प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बागपत में जिस 135 किमी. लंबे ईस्टर्न पेरिफेरेल वे का उद्घाटन किया, बताया जा रहा है कि वह 500 दिन के रिकार्ड समय में पूरा कर लिया गया।
भाजपाई यह कहते फूले नहीं समा रहे कि मोदी सरकार में हाईवे बनाने की रफ्तार दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में ताजनगरी के लोग यह देखकर हैरान है कि यहां के प्रोजेक्ट कछुवे से भी धीमी गति से क्यों चल रहे हैं?
एनच-2 के चौड़ीकरण को ही देख लीजिए। 1300 दिन बाद भी काम अधूरा है। डेडलाइन पर डेडलाइन दी जा रही है लेकिन इस रात की सुबह अभी दूर दूर तक नजर नहीं आ रही। पेश है रिपोर्ट...
अध्ाूरा काम
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी 95 फीसदी कार्य पूरा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सिकंदरा से वाटर वर्क्स तक का दस किलोमीटर के क्षेत्र में तमाम काम अधूरे पड़े हैं।
कहीं नाला अधूरा तो कहीं सर्विस लेन पर गिट्टी डालकर छोड़ दी हैं। कहीं हाईवे के बीच में रेलिंग का काम भी पूरा नहीं हो सका है। लोग परेशान हैं, एल एंड टी के अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर कार्य करा रहे हैं।
एनएच-2 के चौड़ीकरण का काम दिसंबर 2014 में शुरू हुआ था। अभी तक साढ़े तीन साल यानी 42 महीने हो चुके हैं। इन्हें दिनों में बदलें तो लगभग 1300 दिन हैं। कार्यदायी संस्था रिलायंस इन्फ्रा और एल एंड टी के अफसरों ने शुरू से ही धीमी चाल पकड़ी।
ताक पर रखे मानक, अंधेरे में हो रहा काम
डायवर्ट रूट
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अब बेतरतीब ढंग से कराए जा रहे कार्यों ने हालात बिगाड़ दिए हैं। सिकंदरा से लेकर वाटर वर्क्स तक चौड़ीकरण टुकड़ों में किया जा रहा है। कहीं गड्ढे खोदकर छोड़ दिए हैं तो कहीं नाला निर्माण के लिए हाईवे के किनारे लोहे के पाइप डालकर सर्विस लेन को बंद कर रखा है।
टुकड़ों में काम करने से वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कहीं ईंटें, कहीं गिट्टी तो कहीं गड्ढों से भरा हाईवे खतरनाक हो चला है।
कार्यदायी संस्था एल एंड टी ने चौड़ीकरण के कार्य में मानकों को ताक पर रख दिया है। निर्माण कार्य के दौरान किसी तरह का संकेतक नहीं लगाया जा रहा है।
अफसर का है ये कहना
इससे ज्यादा लापरवाही क्या हो सकती है कि रेलिंग लगाने का काम अंधेरे में गाड़ियों की रोशनी में किया जाता है। डंपर, ट्रैक्टर की लाइट जलाकर रेलिंग लगाई जाती है। कई दोपहिया वाहन चालक गुरुद्वारा के पास निर्माणाधीन रेलिंग से टकराकर घायल हो चुके हैं।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मोहम्मद शफी का कहना है कि काम अंतिम चरण में है। इसे जून तक पूरा करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। कई जगह अतिक्रमण, यूटिलिटी शिफ्टिंग के कारण देरी हो रही है। मई के अंतिम सप्ताह में निरीक्षण करके रिपोर्ट देंगे।