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एसआईटी की जांच पूरी, राजभवन को भेजी रिपोर्ट

Sun, 10 Jul 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला आगरा
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बीएड 2004-05 सत्र का परीक्षा परिणाम निरस्त कराने की तैयारी
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8,000 अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया गया था
5,332 अभ्यर्थियों को जांच में फर्जी करार दिया गया


डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड फर्जी मार्कशीट प्रकरण में एसआईटी ने 2004-05 सत्र की जांच पूरी कर ली है। इसमें 8,000 अभ्यर्थियों को मार्कशीट जारी की गई थी। जांच में 5,332 फर्जी पाए गए। इसकी पूरी रिपोर्ट राजभवन को भेज दी गई है। एसआईटी ने राज्यपाल से 2004-05 का परीक्षा परिणाम निरस्त घोषित करने के लिए लिखा है।
बता दें राज्यपाल राम नाईक ने शुक्रवार को ही यूनिवर्सिटी के तमाम फर्जीवाड़े की जांच कराकर कार्रवाई के लिए कहा था। वह यूनिवर्सिटी के ही एक कार्यक्रम में आगरा आए हुए थे। यदि एसआईटी की रिपोर्ट मान ली गई तो पूरे सत्र का परिणाम निरस्त कर दिया जाएगा। लगभग 1500 सहायक अध्यापकों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। इन्होंने इसी सत्र में बीएड किया था।
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एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अगर राजभवन ने एक्शन नहीं लिया तो जांच रिपोर्ट नौ अगस्त को हाईकोर्ट के सामने रखी जाएगी। बता दें, यह जांच हाईकोर्ट की निगरानी में ही चल रही है। एसआईटी पिछले दिनों सात दिन तक यूनिवर्सिटी में डेरा डाले रही थी। यहां से रिकार्ड लखनऊ ले जाकर जांच की गई है। इसके बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।


विश्वविद्यालय की सत्यापन रिपोर्ट गोलमोल
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात एलटी ग्रेड के शिक्षकाें और अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट से माध्यमिक शिक्षा विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई दिन चक्कर काटने के बाद डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने वर्ष 2015 में नियुक्त शिक्षकों की सत्यापन रिपोर्ट दी है। नौ शिक्षकों के प्रमाणपत्रों को न तो सही और न ही गलत ठहराया गया है। इनको संदिग्ध मानते हुए विधिवत सत्यापन के लिए परीक्षा में शामिल होने का प्रमाणपत्र मांगा गया है। 
  माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के करीब माह भर चक्कर काटने के बाद डा. बीआरए विश्वविद्यालय ने सत्यापन रिपोर्ट भेजी है। नौ शिक्षकों का कॉलम खाली छोड़ दिया है। इसमें कुछ नहीं लिखा गया है। अंत में नोट लगाया गया है कि सेक्शन प्रभारियों ने अंक पत्रों को सत्यापित नहीं किया है। कारण, संबंधित शिक्षकों के प्रमाणपत्र से अंक चार्टों के अंकों में भिन्नता है। रोल नंबर अंक चार्ट में प्रिंट नहीं हैं। अंक पत्रों में गड़बड़ी करने का संदेह है। 
 ऐसे आवेदकों से विश्वविद्यालय ने परीक्षा में शामिल होने का प्रमाणपत्र मांगा है। इसमें परीक्षा फार्म की छाया प्रति, प्रवेश पत्र, उपस्थिति प्रपत्र, शुल्क रसीद, जो प्राचार्य से सत्यापित हो। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाएगा। कई दिनों के चक्कर लगाने के बाद कुछ शिक्षकों की रिपोर्ट मिली है। प्रभारी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक आरपी शर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय ने कई शिक्षकों के प्रमाणपत्रों को तो संदिग्ध माना है, पर उनके प्रमाणपत्र को गड़बड़ नहीं ठहराया है। 

केवल यहीं का मामला गड़बड़
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से लेकर कई विश्वविद्यालयों ने सत्यापन रिपोर्ट भेजी है। उनकी रिपोर्ट स्पष्ट है। जिन शिक्षकों या अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र सही हैं, उनको सही और जिनके गड़बड़ हैं, उनके बारे में लिख दिया गया है कि प्रमाणपत्र का बोर्ड या विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं है। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन को खुद के रिकार्ड पर विश्वास नहीं है। इसलिए वह विधिवत सत्यापन के लिए शिक्षक और अभ्यर्थी के परीक्षा के रिकार्ड मांग रहे हैं। 

फर्जीवाड़ा जांच की आशंका से हड़कंप
राज्यपाल ने डा. बीआरए विश्वविद्यालय में हुए फर्जीवाड़े की जांच की बात क्या कही, कइयों के हलक सूख गए। अधिकारियों को इस बात का डर सता रहा है, जिन फर्जीवाड़ों में विश्वविद्यालय या रिजल्ट बनाने वाली एजेंसी शामिल है, उन पर जांच हुई तो निश्चित ही उनकी गर्दन पकड़ में आएगी। आनलाइन फर्जीवाड़ा, जिसमें रिजल्ट जारी करते वक्त विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 49 प्रतिशत अंकों की मार्कशीट थी, चंद दिनों बाद इसे 61 फीसदी कर दिया गया था। स्पष्ट है कि यह खेल आर्थिक सौदेबाजी के बाद ही हुआ। जिन डिग्री-मार्कशीट के लिए छात्र महीनों भटकता है, उनके आवेदन कचरे के ढेर में फेंक दिए गए, इसमें भी डिग्री सेक्शन के कर्मचारी नप सकते हैं।
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विश्वविद्यालय की जांच समिति के संयोजक बने असीजा 
 विश्वविद्यालय की फर्जी अंकतालिका के साथ ही उच्च शिक्षा के लंबित प्रकरणों की जांच को शासन ने नगर विधायक मनीष असीजा के संयोजन में चार सदस्यीय आश्वासन समिति का गठन किया है। यह समिति 13 एवं 14 जुलाई को आगरा में प्रकरणों की जांच पड़ताल करके अपनी रिपोर्ट शासन को देगी। समिति में दलवीर सिंह, जयप्रकाश निषाद एवं आशीष यादव को शामिल किया गया है।


 
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