डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में लिपिक रणवीर सिंह की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। आठ और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी के दो कर्मचारी शुक्रवार को आगरा पहुंच गए। इसका पता चलते ही यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया। हालांकि एसआईटी ने इन्हें आगरा पुलिस के जरिए वारंट तामील कराने के लिए भेजा है।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आठ और आरोपियों के वारंट जारी हो चुके हैं। इन्हें तामील कराकर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आगरा पुलिस की मदद ली जा रही है। एसआईटी ने दो कर्मचारियों को वारंट लेकर भेजा। इनसे कहा गया कि ये वारंट एसएसपी ऑफिस में दिए जाएं। इसके बाद संबंधित थाना की पुलिस इन्हें तामील कराएगी। देर शाम सभी वारंट एसएसपी ऑफिस को दे दिए गए।
एसआईटी के अधिकारियों ने इस बारे में एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह से भी बात की है। उधर, एसआईटी के आने की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी आपस में बात करते नजर आए। सूत्रों ने बताया कि सबसे ज्यादा बेचैनी उन कर्मचारियों में है, जिन्हें एसआईटी ने पूछताछ के लिए नोटिस दे रखा है। इनकी संख्या 20 है।
इनके अलावा दस अधिकारी भी हैं। जिन आठ कर्मचारियों के खिलाफ वारंट जारी किए गए हैं, उनमें से छह बीएड और गोपनीय चार्ट विभाग के लिपिक बताए गए हैं। उधर, इस प्रकरण में फरार चल रहे पूर्व कुलसचिव शिवपूजन सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी ने गोरखपुर के एसएसपी से बात की है। एसआईटी को जानकारी मिली है कि शिव पूजन गोरखपुर में ही छुपे हैं।
इडी से कराई जाएगी संपत्ति की जांच
एसआईटी का जोर फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी पर है। लेकिन साथ ही इनकी संपत्ति के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। केस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि चार्जशीट के बाद इस केस में इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (इडी) से जांच कराई जाएगी। अभी एक लिपिक की गिरफ्तारी की गई है। उसके खिलाफ 90 दिनों से पहले आरोप पत्र दाखिल किया जाना है। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सबसे पहले जल्द से जल्द चार्टशीट दाखिल करने पर जोर रहेगा। इसके बाद सभी की संपत्ति की जांच इडी से कराए जाने के लिए शासन को लिखा जाएगा। फर्जी डिग्री बेचकर कई लोगों ने करोड़ों कमाए हैं।