काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर
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इन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने में विवि कर रहा था हीलाहवाली
आगरा यूनिवर्सिटी का फर्जी बीएड-मार्कशीट घोटाला
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में बड़े पैमाने पर हुए फर्जी बीएड- मार्कशीट घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को आगरा में छानबीन के दौरान बड़े साक्ष्य मिले हैं। आगरा विश्वविद्यालय में एसआईटी को बीएड के शैक्षिक सत्र 2005 की महत्वपूर्ण अवार्ड लिस्ट भी बरामद हो गई है। एसआईटी ने वह साक्ष्य बरामद किए हैं जिन्हें विश्वविद्यालय यह कहकर देने से मना कर देता था कि इसके रिकॉर्ड उनके पास नहीं है।
आगरा विश्वविद्यालय में वर्ष 2004-2005 के दौरान बड़े पैमाने पर बीएड की फर्जी मार्कशीट बनाने का मामला सामने आया था। इस मामले में सात मुकदमे दर्ज हुए हैं। इस मामले में बीएड प्रभारी रनवीर सिंह व लाभार्थी छात्र अशोक कुमार जेल में हैं। इस एसआईटी की जांच में पाया गया कि करीब तीन हजार से अधिक फर्जी मार्कशीट जारी कर जालसाजों ने विश्वविद्यालय की मूल टैबुलेशन चार्ट में इन नामों को बढ़ा दिया था।
इस मामले की जांच उच्च अदालत के निर्देश पर एसआईटी को सौंपी गई थी। अदालत एसआईटी द्वारा की जा रही पड़ताल पर लगातार नजर रख रही है। मामले के विवेचक निरीक्षक पुतान सिंह ने मंगलवार को बताया कि विश्वविद्यालय लगातार अभिलेख उपलब्ध कराने से हीलाहवाली कर रहा था। इसी को देखते हुए एसआईटी की टीम ने पिछले दिनों आगरा विश्वविद्यालय में छापा मारा। वहां से बीएड के वर्ष 2005 के महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसी बहुत सी महत्वपूर्ण फाइले मिली हैं जिसकी एसआईटी को तलाश थी। इन सभी दस्तावेजों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट इलाहाबाद में कुलसचिव प्रभात रंजन ने शपथपत्र देकर विवेचना में सहयोग की बात कही थी। लेकिन उन्होंने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। इस मामले में मिले महत्वपूर्ण दस्तावेजों से जुलाई में इसकी इसकी विवेचना पूरी होने की उम्मीद है।