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गजब का हाल: 15 वर्ष की आयु में पिता, 30 में बने दादा...उम्र के गणित ने उड़ाए होश; 4.39 लाख को नोटिस

Fri, 06 Feb 2026 09:17 AM IST
धीरेन्द्र सिंह देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

एसआईआर के बाद 4.39 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्रों में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। पिता-पुत्र की उम्र में कहीं 15 साल से कम, तो कहीं 50 साल से ज्याका का अंतर है। 
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वोटर लिस्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोई 15 साल की उम्र में पिता बन गया तो कोई 30 साल में दादा। ये हम नहीं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भरे गए गणना प्रपत्र कह रहे हैं। प्रपत्र भरने में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। उम्र के इस गणित में मतदाता ऐसे उलझ गए हैं कि अब उनके मताधिकार पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे करीब 4.39 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
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जिले में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। 4 नवंबर से 26 दिसंबर तक एसआईआर हुआ। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र बांटे और फिर उन्हें भरवाकर जमा कराए। एसआईआर से पहले 36 लाख मतदाता थे। एसआईआर के बाद 36 लाख में 8.36 लाख के नाम कट गए, जबकि 3.25 लाख की मैपिंग नहीं हो सकी थी। मैपिंग से छूटे 3.25 लाख मतदाताओं के साथ 4.39 लाख गलत गणना प्रपत्र भरने वाले मतदाताओं को भी नोटिस जारी होंगे। इस तरह जिले में अब कुल 7.64 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होंगे।



 

बृहस्पतिवार तक 7.64 लाख में 5.25 लाख मतदाताओं के नोटिस प्रिंट हो चुके थे जिनमें 2.40 लाख नोटिस मतदाताओं के घर पहुंच चुके हैं। इनमें 75 हजार मतदाता ही दस्तावेज लेकर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए पेश हुए हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान ने बताया कि बड़े पैमाने पर गणना प्रपत्रों की जांच में तार्किक विसंगतियां सामने आई हैं। कहीं पिता और पुत्र की उम्र में 15 साल से कम अंतर है तो कहीं दोनों की उम्र में 50 साल से अधिक।

इसके अलावा बड़ी संख्या में मतदाताओं ने माता-पिता का नाम तक गलत लिखा है। अंग्रेजी की स्पेलिंग में भारी गलतियां हैं। ऐसे सभी मतदाताओं को अनमैप्ड मतदाताओं की तरह नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिता और पुत्र की उम्र में 15 साल से कम और 50 साल से अधिक उम्र का अंतर नहीं हो सकता। इसी तरह पौत्र और दादा की उम्र में भी 40 साल से कम अंतर देखने को नहीं मिलता। यह सिर्फ प्रपत्रों को भरते समय बरती गई लापरवाही का नतीजा है।

 

बीएलओ की लापरवाही, मतदाताओं की बेरुखी
एसआईआर के दौरान बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना था लेकिन हकीकत यह है कि न तो बीएलओ घर-घर गए और न मतदाताओं ने फॉर्म सही से भरे। बीएलओ ने उनके मिलान की जहमत नहीं उठाई। नतीजा विसंगतियों के रूप में सामने आया है। अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
 

आंकड़े
- 7.64 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होने हैं
- 5.25 लाख नोटिस जेनरेट हुए बृहस्पतिवार तक
- 2.40 लाख मतदाताओं के घर तक नोटिस पहुंचे
- 75 हजार मतदाता सुनवाई के लिए पेश हुए
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आज मतदाता बनने का आखिरी मौका
जिला निर्वाचन अधिकारी अरविंद बंगारी के अनुसार जिन मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं या जिनके फॉर्म में त्रुटियां हैं, उनके पास खुद को वोटर बनाए रखने का शुक्रवार को अंतिम अवसर है। प्रभावित मतदाताओं को फॉर्म-6 भरकर आवेदन करना होगा। वहीं, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष 26 फरवरी तक नोटिस मिलने वाले मतदाताओं को दस्तावेजों के साथ जवाब दाखिल करना होगा। यदि तय समय सीमा के भीतर नोटिस का जवाब और सही साक्ष्य नहीं दिए गए, तो लाखों मतदाताओं को आगामी चुनावों में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है।

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