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हड़ताली जूनियर डॉक्टरों की संवेदनहीनता, बीमार बच्ची को इमरजेंसी से किया बाहर, मौत

Mon, 17 Sep 2018 07:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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मेडिकल कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करते जूनियर डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के ‘धरती के भगवान’ कहे जाने वाले डॉक्टरों का असंवेदनशील चेहरा सामने आया। पहले तो बर्थडे पार्टी पर शराब के लिए बवाल किया। जब पुलिस ने कार्रवाई की तो हड़ताल पर चले गए। मरीजों को इमरजेंसी से बाहर निकाल दिया। इसमें एक बीमार बच्ची की मौत हो गई। 
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इमरजेंसी में भर्ती न्यूमोनिया से पीड़ित नौ महीने के मासूम रुद्र को जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद इमरजेंसी से बाहर निकाल दिया गया। टेढ़ी बगिया निवासी उसके पिता मनोज कुमार का आरोप है कि उपचार रुक जाने से बेटे की मौत हो गई। 

मनोज का कहना है कि उसके पास बेटे को निजी अस्पताल में ले जाने के लिए पैसे नहीं थे। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से रविवार शाम चार बजे तक इमरजेंसी सेवाएं ठप रहीं। इसके बाद मेडिकल आफिसर्स इंचार्ज ने इमरजेंसी सेवाएं चालू कराईं लेकिन जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर ही रहे।
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तपड़ते रहे मरीज, देखते रहे डॉक्टर

इमरजेंसी के गेट पर मरीज इलाज के लिए तड़पते रहे, लेकिन डाक्टरों ने मुंह फेर लिया। तीमारदार बार-बार अपने मरीज की जान की दुहाई देते हुए भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा। एसएन में रविवार को 40 से अधिक गंभीर हालत के मरीज पहुंचे। 

इसमें ब्रेन हैमरेज, सड़क दुर्घटना में घायल, पीलिया, लकवा के मरीज रहे। 108 एंबुलेंस सेवा तो कोई ऑटो में लेकर मरीजों को इलाज के लिए लाया। लेकिन हड़ताल के चलते डाक्टरों ने मरीजों को देखने से साफ मना कर दिया। गेट के अंदर तक नहीं घुसने दिया। 

हड़ताल के बाद सीओ, प्राचार्य से वार्ता करने के लिए इमरजेंसी आए। यहां धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टर उनसे उलझ गए। पुलिस को अंदर नहीं जाने दे रहे थे, इस पर काफी तकरार हुई। ऐसे में उन्होंने एसपी सिटी को इसकी सूचना दी। एसपी सिटी आए और उनकी भी जूनियर डॉक्टरों से बहस हुई। एसपी सिटी के सख्त तेवर देख जूनियर डॉक्टर माने और अंदर जाकर प्राचार्य से उन्होंने वार्ता की। 
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एसएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से 16 घंटे तक इमरजेंसी सेवाएं ठप रहीं। भर्ती मरीजों को बाहर निकाल दिया गया, गेट पर बेरीकेडिंग कर दी। धरना देकर पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कॉलेज प्रशासन की दखल के बाद इमरजेंसी से बैरीकेडिंग हटा दी, लेकिन जूनियर डॉक्टर चिकित्सकीय कार्य पर नहीं लौटे। 

नए बैच के मेडिकल छात्रों को किया आगे

प्रदर्शन में नए बैच के मेडिकल छात्रों को आगे कर दिया, जबकि सीनियर छात्र धरने पर नहीं बैठे। नए बैच की कक्षाएं अगस्त से शुरू हुई हैं। इनको ही धरने पर बैठा दिया। कुछ मेडिकल छात्र धरने से उठकर जाना भी चाहते थे, लेकिन सीनियरों के भय के चलते वह ऐसा नहीं कर सके।
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