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'योगीराज' की नगरी में नहीं निकलेगी भगवान श्रीराम की बरात, लीला मंचन पर भी संशय

Tue, 15 Sep 2020 12:22 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

  • चित्रकूट में होने वाली रामलीला के आयोजन पर भी संशय के बादल
  • श्री रामलीला सभा ने कहा- इस बार सिर्फ परंपराओं का ही निर्वहन होगा
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रामलीला मंचन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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योगीराज श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में इस बार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की बरात नहीं निकलेगी और न ही जनकपुरी सजेगी। कोरोना महामारी के कारण श्रीराम लीला सभा ने इस वर्ष आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है। चित्रकूट में होने वाले रामलीला मंचन पर भी अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।

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लगभग सवा सौ वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब शहर के लोगों की आस्था से जुड़ा भव्य आयोजन नहीं हो सकेगा। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सभी कार्यक्रम स्थगित हैं। इस कड़ी में अब मथुरा की रामलीला का नाम भी जुड़ गया है। 


अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध रामलीला की शुरुआत हर वर्ष श्राद्घ पक्ष की एकादशी भगवान श्रीराम के जन्म के साथ होती है, लेकिन इस बार धार्मिक आयोजनों पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। इस कारण शहर में निकाली जाने वाली राम बरात का भी आयोजन नहीं हो सकेगा।

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सूक्ष्म रूप में होगा परंपराओं का निर्वहन

श्री रामलीला सभा (रजिस्टर्ड) के सभापति जयंती प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि इस बार रामलीला का भव्य मंचन न करते हुए सूक्ष्म रूप में परंपराओं का निर्वहन किया जाए। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने मर्यादाओं का अनुसरण किया था। 

उसी तरह रामलीला कमेटी ने जनहित में मर्यादाओं का पालन करते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार की गाइडलाइन के अनुसार रामलीला का आयोजन स्थगित करने का निर्णय लिया है। इस बार राम बरात नहीं निकाली जाएगी। सभा के पदाधिकारियों की आगामी बैठक में जो निर्णय होगा। उसके अनुसार कार्यक्रम निर्धारित होंगे। 

श्रीरामलीला सभा के प्रधानमंत्री मूलचंद गर्ग ने कहा कि इस साल रामलीला बहुत ही सांकेतिक रूप से होगी। शासन और प्रशासन द्वारा रामलीला के आयोजन के लिए स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है। ऐसे में रामलीला का आयोजन किया जाना असंभव है। हां, इतना जरूर है कि जो परंपराएं चली आ रही हैं, उनका निर्वहन अवश्य किया जाएगा। 
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हजारों लोगों के रोजगार पर पड़ेगा असर

श्रीरामलीला सभा के प्रचार मंत्री शशांक पाठक ने कहा कि श्रीराम लीला सभा मथुरा की बहुत ही प्राचीन एवं सिद्ध रामलीला है। जो हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में प्रारंभ होती थी। लेकिन इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लीलाओं का मंचन प्रमुख रूप से नहीं हो पा रहा है। हम सभी रामभक्त प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि शीघ्र ही महामारी समाप्त हो। 

अनिल शास्त्री ने बताया कि रामलीला के न होने से हजारों लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। कलाकार से लेकर कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट हो जाएगा। एक रामलीला के आयोजन से कलाकारों से लेकर छोटे-छोटे कारीगर भी जुड़े रहते हैं। रामलीला होगी या नहीं, इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसीलिए कलाकारों का भी चयन नहीं किया गया है।
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