मॉकड्रिल के समय हुई छह मौतें
वीडियो में डॉ. अरिन्जय जैन सुबह सात बजे मॉकड्रिल की बात कह रहे थे। डीएम ने बताया कि छह मृतक ऐसे हैं जिनकी मृत्यु का समय मॉकड्रिल के समय से मिल रहा है। हालांकि जांच में मॉकड्रिल को ऑक्सीजन निर्धारण की प्रक्रिया माना गया है।
16 में से आगरा के 11 मृतक
- 26 व 27 अप्रैल को मरने वाले 16 मरीजों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में 14 ऐसे मिले हैं जिन्हें पुरानी बीमारियां थीं। सिर्फ 2 मृतक ऐसे हैं जिन्हें कोई बीमारी नहीं थी। 16 मृतकों में 11 आगरा, दो मैनपुरी, दो फिरोजाबाद, एक इटावा से था। कुल नौ मृतक ऐसे थे जिन्होंने अस्पताल में भर्ती होने एक से पांच दिन में दम तोड़ दिया। पांच मृतक ही दस दिन से अधिक समय तक भर्ती रहे।
आरोपियों के बयानों पर बनाई जांच रिपोर्ट
मॉकड्रिल मामले में प्रत्यावेदन देने वाले नरेश पारस व जनप्रहरी नरोत्तम शर्मा ने प्रशासनिक जांच में लीपापोती के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पीड़ितों के बयानों पर जांच नहीं की गई। आरोपितों के बयानों के आधार पर पूरी जांच रिपोर्ट बनाई है। इस मामले की जांच हाईकोर्ट की कमेटी को करनी चाहिए।
जांच रिपोर्ट नहीं की सार्वजनिक
जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उसमें 50 से 75 पन्ने हैं। आगे मामले की जांच पुलिस करेगी। जिन दस लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी उन्हें डेथ समरी दी गई है। प्रेस रिपोर्ट में जांच के सभी मुख्य बिन्दुओं को शामिल किया है।
इन सवालों के जवाब अधूरे
- 26 अप्रैल को अस्पताल में कुल कितने मरीज भर्ती थे
- कितने मरीज वेंटीलेटर व हाईफ्लो ऑक्सीजन पर थे
- 26 से 28 अप्रैल तक कितने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए
- गैर जिलों के कुल कितने मरीज थे, कितनों ने दम तोड़ा
- मृतकों के परिजनों के बयानों पर क्या कार्रवाई हुई
- वीडियों जांच के लिए फोरेंसिक लैब क्यों नहीं भेजे गए
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