श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आज शाही ईदगाह मस्जिद की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें हिंदू पक्षों द्वारा दायर 18 मुकदमों की स्वीकार्यता को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट के इस निर्णय का श्रीकृष्ण जन्मस्थान के सचिव स्वागत किया है। साथ ही कहा है कि ये पहली सीढ़ी पर जीत हासिल हुई है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह केस पर जन्मस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि लंबी प्रतीक्षा के बाद इस केस में हिंदू पक्ष को पहली सीढ़ी पर जीत हासिल हुई है। भगवान श्रीकृष्ण इसी प्रकार कृपा रखेंगे जल्द ही फैसला जन्मभूमि पक्ष में आएगा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। अगर, विपक्ष इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो वहां भी अपने अधिवक्ता के माध्यम से माकूल जवाब दाखिल किया जाएगा। साथ ही कैविएट भी दाखिल की जाएगी, जिससे की सुप्रीम कोर्ट कोई भी फैसला देने से पूर्व जन्मभूमि पक्ष को भी सुने।
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एक नजर में समझें पूरे विवाद की कहानी
18 वाद अब तक श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह विवाद में दाखिल। 25 सितंबर 2020 को पहला वाद लखनऊ की रहने वाली अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने सिविल जज सीनियर डिवीजन, मथुरा के न्यायालय में दायर किया था। इसमें शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के बीच 1968 में हुए समझौते को रद्द करने की मांग की गई थी।25 सितंबर 2020 को रंजना अग्निहोत्री के वाद को न्यायालय ने निरस्त किया और कहा कि उन्हें वाद दायर करने का अधिकार नहीं है। 15 अक्तूबर 2020 को जिला जज के न्यायालय में अपील की गई। 15 दिसंबर 2020 को मनीष यादव, अध्यक्ष नारायणी सेना ने वाद दाखिल किया।
23 दिसंबर 2020 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप ने वाद दाखिल किया, जो पहला वाद था, जिसे कोर्ट द्वारा सुनवाई को स्वीकार किया गया। 2 फरवरी 2021 को पवन कुमार शास्त्री, सेवायत, प्राचीन केशवदेव मंदिर ने वाद दाखिल किया। 20 फरवरी 2021 को शैलेंद्र सिंह ने वाद दायर किया। 2 मार्च 2021 को हिंदूवादी नेता दिनेश चंद्र शर्मा ने वाद दायर किया। 31 मार्च 2021 को अनिल कुमार त्रिपाठी ने वाद दायर किया। 7 सितंबर 2021 को जितेंद्र सिंह विसेन ने वाद दायर किया। 24 सितंबर 2021 को गोपाल गिरि महाराज ने वाद दायर किया।
8 दिसंबर 2022 को विष्णु गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू सेना ने वाद दायर किया। 23 दिसंबर 2022 को महेंद्र प्रताप सिंह ने आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में श्रीविग्रह दबे होने का दावा करते हुए दूसरा वाद दायर किया। 2 जनवरी 2023 को आशुतोष पांडेय ने वाद दायर किया। 12 अप्रैल 2023 को अजय प्रताप सिंह ने वाद दायर किया। 22 मई 2023 को नरेश यादव ने वाद दायर किया। 23 मई 2023 को हरिशंकर जैन ने वाद दायर किया। 10 अगस्त 2023 को सुरेंद्र गुप्ता ने वाद दायर किया। 11 अगस्त 2023 को ओमप्रकाश सिंघल ने वाद दायर किया। 26 मई 2023 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े सभी वादों को सेशन कोर्ट से हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया। 20 मार्च 2024 को कौशांबी टेवां के वीरेंद्र सिंह और ठाकुर विजय कुमार सिंह ने वाद दायर किया।