नब्बे के दशक में मथुरा में गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, विजय बहादुर सिंह, सतीश डाबर, राकेश चतुर्वेदी, डॉ. देवेंद्र शर्मा, राजेश चौधरी आदि ने आंदोलन की कमान संभाल रखी थी। उस समय आंदोलन भले ही श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए था लेकिन नारे अयोध्या, मथुरा, काशी का ही लगता था।
मुरादाबाद से उठी थी अयोध्या, मथुरा, काशी की मुक्ति की आवाज
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि 1983 में मुरादाबाद में हिंदू जागरण मंच का सम्मेलन हुआ था। जिसमें अयोध्या, मथुरा, काशी के लिए आंदोलन की आवाज पहली बार उठी थी।
गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि अयोध्या में आंदोलन की जिम्मेदारी अशोक सिंघल को सौंपी गई। 1990 में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना के बाद जब 1991 में मुलायम सिंह यादव मथुरा आए तो उनको काले झंडे दिखाए गए। इसके बाद देश भर में मुलायम सिंह जहां भी गए काले झंडे दिखाए गए। मथुरा से ही इस विरोध की शुरूआत हुई।