फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रीकृष्ण जन्मभूमि: अब कान्हा का चाहिए जन्मस्थान, याचिका दाखिल होने से मथुरा में हलचल

Mon, 28 Sep 2020 12:24 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
विज्ञापन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर मथुरा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

लंबी कानून लड़ाई के बाद अयोध्या में रामलला को उनके जन्मस्थान का हक मिल गया। इसके बाद अब भक्तों ने नंदलाला (कान्हा) को उनका जन्मस्थान दिलाने की कानूनी लड़ाई शुरू की है। दशकों राममंदिर आंदोलन की कमान संभालने वाले मथुरावासियों की अयोध्या के बाद अब मथुरा और काशी के मंदिरों की मुक्ति पर नजर है। कोर्ट में अयोध्या में श्रीराम मंदिर का रास्ता साफ हुआ तो निर्माण भी शुरू हो गया। 

विज्ञापन


कुछ दिन पूर्व श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आंदोलन का नारा लगाते हुए हिंदू आर्मी के कार्यकर्ता लखनऊ से मथुरा तक पहुंचे थे। हालांकि उन्हें यहां गिरफ्तार कर लिया गया। हिंदू आर्मी के एलान को लेकर मथुरा में हलचल मची थी। अब लखनऊ के अधिवक्ताओं ने भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से जन्मभूमि की मुक्ति के लिए याचिका दायर कर माहौल गरम कर दिया है। 


अयोध्या में भगवान श्रीराम एवं मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और काशी में भगवान शिव का मंदिर हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विश्व हिंदू परिषद कई दशकों से इन स्थानों से मुगलकालीन पहचान समाप्त करने के लिए आंदोलनरत है। इन आंदोलनों को चलाने में मथुरा बड़ा केंद्र रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

नब्बे के दशक में मथुरा में गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, विजय बहादुर सिंह, सतीश डाबर, राकेश चतुर्वेदी, डॉ. देवेंद्र शर्मा, राजेश चौधरी आदि ने आंदोलन की कमान संभाल रखी थी। उस समय आंदोलन भले ही श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए था लेकिन नारे अयोध्या, मथुरा, काशी का ही लगता था। 


मुरादाबाद से उठी थी अयोध्या, मथुरा, काशी की मुक्ति की आवाज 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि 1983 में मुरादाबाद में हिंदू जागरण मंच का सम्मेलन हुआ था। जिसमें अयोध्या, मथुरा, काशी के लिए आंदोलन की आवाज पहली बार उठी थी। 

गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि अयोध्या में आंदोलन की जिम्मेदारी अशोक सिंघल को सौंपी गई। 1990 में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना के बाद जब 1991 में मुलायम सिंह यादव मथुरा आए तो उनको काले झंडे दिखाए गए। इसके बाद देश भर में मुलायम सिंह जहां भी गए काले झंडे दिखाए गए। मथुरा से ही इस विरोध की शुरूआत हुई। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें