आगरा। चांदी के आयात को फ्री श्रेणी से हटाकर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। केंद्र सरकार के फैसले से देश के सबसे बड़े चांदी और पायल निर्माण केंद्र, आगरा के उद्योग पर असर पड़ेगा। पहले ही आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% करने से चांदी कारोबारी परेशानी में थे। अब सरकारी नियंत्रण बढ़ने से किनारी बाजार, जौहरी बाजार, रावतपाड़ा और नमक की मंडी के सराफा कारोबारी चांदी की किल्लत होने की आशंका जता रहे हैं।
आगरा में रोजाना 6 से 7 टन चांदी केवल आयात होती है। भारतीय कंपनियों और घरेलू पुरानी चांदी की मात्रा इससे अलग है। चार हजार से ज्यादा इकाइयों में आयात चांदी का बड़ा हिस्सा पायल और बिछिया बनाने में जाता है। अब तक फ्री श्रेणी में होने के कारण बुलियन व्यापारी आसानी से मांग के मुताबिक चांदी आयात कर लेते थे।
शनिवार से लागू नियम के तहत अब 99.9% शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियां, अनगढ़ चांदी, और सेमी-प्रोसेस्ड चांदी या पाउडर मंगाने के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड से विशेष लाइसेंस और सरकार की पूर्व अनुमति लेनी होगी। इससे नौकरशाही प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई के कारण बाजार में चांदी की आवक धीमी हो जाएगी, जिससे स्थानीय कारखानों को समय पर कच्चा माल मिलना मुश्किल होगा। आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी के कारण पहले ही लागत बढ़ चुकी है। अब लाइसेंस की अनिवार्यता का सीधा असर आभूषण कारोबारियों और छोटे जौहरियों पर पड़ेगा।
निवेशकों पर कसा शिकंजा
बुलियन फेडरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन अजय अग्रवाल अवागढ़ ने बताया कि सरकार के नए नियम से चांदी के आयात के लिए शर्तों का पालन करना होगा। इससे निवेशकों पर शिकंजा कसा जाएगा, जबकि घरेलू मांग के लिए चांदी उपलब्ध रहेगी। इस मसले पर बुलियन कारोबारी सरकार से मिलकर स्थिति स्पष्ट भी कराएंगे।
सराफा कमेटी के महासचिव देवेंद्र गोयल ने बताया कि चांदी की बढ़ी कीमतें और बाजार में इसकी उपलब्धता न होने के कारण छोटे उद्यमियों की कार्यशील पूंजी ब्लॉक हो जाएगी। जॉब-वर्क पर काम करने वाले स्थानीय कारीगरों के पास काम की कमी हो सकती है।
सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष धन कुमार जैन के मुताबिक चांदी के आयात को प्रतिबंधित करने के फैसले का क्या असर पड़ेगा, पहले यह देखा जाएगा। निवेशकों की जगह असली खरीदार के लिए चांदी की कमी पड़ेगी या नहीं, पहले स्थिति स्पष्ट हो जाए।
छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ी
शहर में चांदी पायल का उद्योग काफी पुराना है। यहां से देशभर में पायल सप्लाई होती है। बोदला, ट्रांस यमुना, शाहगंज, लोहामंडी, माईथान, सेठ गली, बल्केश्वर, नमक की मंडी, गोकुलपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चांदी पायलों का काम होता है।
अजय अग्रवाल, देवेंद्र गोयल, धन कुमार जैन
अजय अग्रवाल, देवेंद्र गोयल, धन कुमार जैन