आगरा के आठ में से सात मरीजों ने कोरोना से जंग जीत ली है। ये सभी जूता कारोबारी के परिवार और फैक्टरी से जुड़े लोग हैं। तीन पहले स्वस्थ्य होकर दिल्ली से लौट चुके। चार शुक्रवार को लौट आए। शहर में अब सिर्फ रेलवे अधिकारी की बेटी की कोरोना से पीड़ित बची है। उसका जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जूता कारोबारी, उनकी पत्नी, दो बेटों, पुत्र वधू में कोरोना की पुष्टि हुई थी। उनकी मां को भी तेज बुखार था। इस कारण उन्हें भी दिल्ली भेजा गया था उपचार के लिए।
बाद में कंपनी के एक कर्मचारी और उसकी पत्नी को कोरोना मिला। इस तरह सात मरीज हो गए। ये सभी स्वस्थ हो गए हैं। इन लोगों के संपर्क में आए एक हजार से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई थी। सभी स्वस्थ मिले थे।
हौंसला रखा ... ठीक हो गए
आगरा। जूता कारोबारी के परिवार के नजदीकी लोगों ने स्वस्थ होकर लौटने वालों से बात की। उन्होंने बताया कि पूरे परिवार को शुरू में डर लगा था लेकिन डॉक्टरों ने काउंसलिंग की तो हिम्मत बन गई। डॉक्टरों ने जो गाइड लाइन दी, उसका पालन किया। कोरोना से उपचार में दवाइयों केबराबर ही रोल आत्मविश्वास का है। हमने यही किया।
18144 घरों में दस्तक देकर लोगों का हाल जाना
स्वास्थ्य विभाग की 112 टीमें बृहस्पतिवार को भी हेल्थ सर्वे के लिए निकलीं। कुल 18144 घरों में दस्तक देकर लोगों का हाल जाना है। उन्हें जरूरी एहतियात बरतने के लिए जागरूक किया।
रकाबगंज नॉर्थ और साउथ, बुंदू कटरा, देवरी रोड, नरीपुरा, शाहगंज क्षेत्रों में सर्वे किया गया। इसमें लोगों से परिवार के सदस्यों का हाल पूछा जा रहा है। पता किया जा रहा है कि कोई जुकाम-खांसी, बुखार से पीड़ित तो नहीं है। 30 दिन में कोई विदेश यात्रा से लौटा तो नहीं या फिर लौटने वाले किसी व्यक्ति के संपर्क में तो नहीं आया। स्वास्थ्य सर्वे के नोडल प्रभारी डॉ. संजीव बर्मन ने बताया कि अब तक के अभियान में 2,26,493 घरों तक टीमें पहुंचकर हेल्थ सर्वे कर चुकीं हैं।