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UP: इन पांच ठगों के कारनामे जानकर चकरा जाएगा दिमाग, मदद का भरोसा और...मिनटों में बना देते हैं कंगाल

Tue, 28 Jan 2025 10:32 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा पुलिस ने पांच ऐसे ठगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके कारनामे जानकर आपका भी दिमाग चकरा जाएगा। भोले-भाले लोगों को ये लोग उनकी मदद का भरोसा दिलाकर शिकार बनाते हैं। एक बार कोई इनके झांसे में आया, तो उसे  कंगाल करके ही छोड़ते हैं।
 
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डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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शहर में ईरानी गिरोह वारदात करने आया था। पूर्व में दो महिलाओं से गहने लूटकर फरार हो गया था। एक बार फिर वारदात से पहले पुलिस ने पकड़ लिया। सोमवार रात को जीआईसी मैदान के पास मुठभेड़ में दो बदमाशों को गोली लग गई। तीन अन्य बाद में पकड़ लिए गए। दो और की तलाश की जा रही है। आरोपी पुलिसकर्मी बनकर लूट का भय दिखाकर लूट लेते थे।
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डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि हाशिम हुसैन, मीसम हुसैन, मोईन (बडवानी, मध्य प्रदेश), सलीम उर्फ सलमान (टेढ़ी बगिया) और हसन अली उर्फ हसनैन अली (उड़ीसा) को गिरफ्तार किया। 10 अगस्त, 2024 मथुरा की रहने वाली महिला से आगरा काॅलेज के सामने वारदात हुई थी। 
 

पुलिसकर्मी बनकर लूट का भय दिखाकर गिरोह से गहने उतरवा लिए थे। इसी तरह 17 दिसंबर, 2024 को बाजार जा रही हसनपुरा की महिला के गहने उतरवाए गए थे। उन्हें 12 साल की बच्ची ने कागज की गड्डी दिखाकर जाल में फंसाया था। बाद में उसके साथी ने गहने उतरवा लिए थे।
सोमवार रात को लोहामंडी पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने जीआईसी मैदान के पास बदमाशों को घेर लिया।

पुलिस के रोकने पर उन्होंने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में हाशिम हुसैन और ट्रांसयमुना के सलीम उर्फ सलमान के पैर में गोली लगी है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनके साथी गैंग लीडर सैंधवा, मध्यप्रदेश के मुख्तार और अकबर हैं। उनकी पुलिस तलाश कर रही है।

आती है ईरान की भाषा
एसीपी लोहामंडी मयंक तिवारी ने बताया कि गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में पता चला कि उनके पूर्वज ईरान में रहते थे। सालों पहले कई भारत में आकर बस गए थे। परिवार के लोगों को ईरान की फारसी भाषा भी आती है। इस कारण गिरोह को ईरानी गिरोह बोला जाता है। वह अलग-अलग शहरों में जाते हैं। परिचित के घर और होटल में रुकते हैं। उस जिले के आसपास के जिलों में वारदात करने जाते हैं। राह चलते अकेले जाने वालों को रोकते हैं। उन्हें पुलिसकर्मी बताते हैं। अपने पास पुलिस का फर्जी आईडी कार्ड रखते हैं। उन्हें बताते हैं कि आगे लूट हो गई है। गहने उतारकर रख लो। इसके बाद गहनों को रखने के बहाने नकली देकर फरार हो जाते हैं।
 

और भी हैं तरीके
गिरोह क सदस्य लोगों को रुपये दोगुना करने का लालच भी देते हैं। रास्ते में लोगों को बहाने से रोकते हैं। पर्ची खिंचवाते हैं। इस दाैरान लोगों की ज्यादा रकम लगाते हैं। रुपये बहाने से लेकर फरार हो जाते हैं। अपने पास एक कागज की गडडी रखते हैं, जिस पर ऊपर की तरफ असली नोट होता है। बाकी कागज होते हैं। कई बार गड्डी देकर भाग जाते हैं। 
 
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एक तरीका सराफ की दुकान पर जाकर गहने पार करने का भी है। दुकान पर गहने देखने के दाैरान हाथ की अंगुलियों में छिपा लेते हैं। गिरफ्तार आरोपियों से जेवरात, 26 हजार रुपये, एक कार, 10 लिफाफे, पुलिस के 4 फर्जी आईडी कार्ड, 3 कागज की गड्डी आदि बरामद की गई हैं।
 
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