श्रावण मास में ताजमहल की आरती करने के एलान के बाद पुरातत्व विभाग ने स्मारक के बाहर सुरक्षा की मांग की है। अधीक्षण पुरातत्वविद बसंत स्वर्णकार ने जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार को इस संबंध में पत्र लिखा है। कहा है कि ताज में पूर्व में कभी भी कोई पूजा अर्चना एवं महाआरती नहीं की हुई है।
बीते दिवस प्रेसवार्ता के दौरान शिव सेना के प्रदेश उप प्रमुख वीनू लवानिया ने कहा था कि ताजमहल, तेजोमहालय है और हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। इसको देखते हुए श्रावण मास के चारों सोमवार को ताजमहल की आरती की जाएगी।
इस पर पुरातत्व विभाग अभी से सक्रिय हो गया है। 18 जुलाई को डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के खंड 5 (6) एवं नियम 1959 8 (एफ) के प्रावधानों के अनुसार, संरक्षित स्मारक में किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन एवं नई परंपरा की शुरुआत करना नियम विरुद्ध है।
ऐसे में शिवसैनिकों के एलान को देखते हुए ताजमहल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की है।