यूरोप में मंदी और देश में सबसे महंगी ताज की टिकट होने का बुरा असर ताजमहल के कद्रदानों पर पड़ा है। लगातार तीसरे साल ताज के दीदार के लिए आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। देश में जनवरी से सितंबर तक जहां 11.3 फीसदी विदेशी पर्यटक बढ़े हैं, वहीं ताजमहल पर इसी अवधि में 9 फीसदी पर्यटक कम पहुंचे। हेरिटेज आर्क, गोल्डन ट्राएंगल के प्रचार के बाद भी बुनियादी सुविधाओं में कमी और बेहद महंगी टिकट को पर्यटकों की संख्या घटने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
ताजमहल पर एक ओर तो पर्यटकों में कमी आई है, वहीं पर्यटन मंत्रालय इस मुश्किल भरे वक्त में ताज सहित देश भर के स्मारकों की टिकट दो से तीन गुना कर रहा है। विदेशी पर्यटकों की टिकट दर 250 से बढ़ाकर 750 रुपये की जा रही है तो भारतीय पर्यटकों को 10 की जगह 30 रुपये की टिकट खरीदनी होगी। ताजमहल पर टोल टैक्स के कारण 500 रुपये राज्य सरकार वसूलती है। इस तरह अभी ताज का टिकट 750 रुपये का है जो एक नवंबर के बाद 1250 रुपये का हो जाएगा।
इस साल 4.38 लाख ही पहुंचे हैं ताज
पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर तक देश में 53.60 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। इसमें से ताजमहल तक सिर्फ 4.38 लाख ही पहुंचे। बीते साल से ताज पर करीब 20 फीसदी सैलानियों की कमी आई है। नए सीजन के सितंबर में ही 5.40 लाख पर्यटक देश में आए, लेकिन ताज पर महज 43,034 ही पहुंच सके।
कब कितने पर्यटक पहुंचे
यूरोप के कई देश संकट में हैं। पश्चिम एशिया में हालात खराब हैं। ऐसे वक्त में टिकट दर कम करनी चाहिए थी, लेकिन मंत्रालय टिकट बढ़ा रहा है। ताजमहल और आगरा में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की माउथ पब्लिसिटी अब बुरा असर डाल रही है।
राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन