शिक्षामित्रों ने एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ ली है
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शिक्षामित्रों को शासन से प्रस्तावित 10 हजार रुपये मानदेय स्वीकार नहीं है। शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को वाहन रैली निकाल विरोध जताया। मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट का घेराव किया। सहायक मंडलायुक्त को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देकर मांगें दोहराई। साथ ही एलान किया कि शनिवार को आगरा आ रहे उप मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा।
तय कार्यक्रम के अनुसार डायट परिसर में सैकड़ों शिक्षामित्र एकजुट हुए। हाथों में पोस्टर और तिरंगा लेकर नारेबाजी करते हुए कमिश्नरी पहुंची। आधा घंटे तक कमिश्नरी का घेराव कर मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। सहायक मंडलायुक्त का ज्ञापन सौंपा। संस्था जिलाध्यक्ष वीरेंद्र छौंकर ने कहा कि 10 हजार रुपये मासिक मानदेय कतई मंजूर नहीं है।
मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन से शनिवार को आगरा में होने वाले किसान ऋण माफी योजना के तहत प्रमाण पत्र वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से मिलने का समय मांगा है। अगर इजाजत नहीं दी जाती तो उनका विरोध किया जाएगा।
चौपट हुई स्कूलों में पढ़ाई
आंदोलन से प्राथमिक विद्यालयों की पढ़ाई पूरी तरह से चौपट हो गई है। शुक्रवार को भी 189 स्कूलों के ताले नहीं खुले। शिक्षकों की कमी के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के वैकल्पिक व्यवस्था के दावे भी फुस साबित हुए। आंदोलन के चलते 2943 शिक्षामित्र कार्य बहिष्कार पर हैं। बीएसए अर्चना गुप्ता का कहना है कि 189 स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो पा रही। इन स्कूलों में अन्य ब्लाक के स्कूलों में तैनात शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है।
ये हैं मांगें:
- पांच सितंबर को जारी प्रस्ताव में बदलाव हो, समान कार्य-समान वेतन व्यवस्था हो।
- सुप्रीम कोर्ट से जारी आदेश पर सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कराए।
- निर्णय आने तक शिक्षामित्रों को समायोजित पद पर कार्य करने दिया जाए।
- शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बनाए रखने को नया कानून बने।
- संगठन के प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मिलवाया जाए।
- मृतक शिक्षामित्र के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए।