अमर उजाला में 26 जुलाई, 1965 को छपी खबर के अनुसार बंगलुरू में आयोजित कांग्रेस महासमिति की बैठक में रखे एकता प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए शास्त्री ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस इकाई में एकता न रख पाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उन्होंने पार्टी के लोगों से अपील की थी कि वे मिलजुल कर मतभेद दूर करें। मनमुटाव दूर करना जरूरी है।
शास्त्री ने कांग्रेसियों से कहा था कि पार्टी में मतभेद महात्मा गांधी के वक्त भी थे। लेकिन इन्हें इतना नहीं बढ़ाना चाहिए कि संगठन को ही नुकसान होने लगे। कहा था कि अगर वे आपसी मनमुटाव हल न कर सकें तो उसे केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेज दें। पार्टी में कलह का संदेश जनता में नहीं जाना चाहिए। कांग्रेस को समाजवादी समाज की स्थापना का लक्ष्य पूरा करना है। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा।