दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल की सेहत भारी प्रदूषण के कारण बिगड़ रही है। दिल्ली ने तो ऑड-ईवन जैसे प्रयोग पर्यावरण में सुधार लाने के लिए किए, लेकिन आगरा में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दो दर्जन आदेशों के बाद भी प्रदूषण कम नहीं हुआ है। आगरा की हवा पूरे प्रदेश में सबसे दूषित है तो वहीं यमुना नदी भी नाले का रूप लेती जा रही है। प्रदूषण के कारण ही काइरोनोमस कीड़े ताज की दीवारों को हरे रंग में रंग चुके हैं, मीनारें और गुंबद कार्बन कणों की से पीले और भूरे हो चुके हैं।
यह पहला मौका है जब ताजमहल के पास हवा भी जहरीली है और पानी भी। अटलांटा विश्वविद्यालय, आईआईटी रुड़की और एएसआई केमिकल ब्रांच की जांच में ताजमहल पर कार्बन कणों के साथ बायोमास मिला। यही वजह है कि ताज पीला और भूरा पड़ चुका है। एएसआई केमिकल ब्रांच ने ताज पर मडपैक ट्रीटमेंट किया तो उसकी असली चमक सामने आई। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम के मुताबिक, जब तक वायु प्रदूषण पर अंकुश नहीं लगता तब तक ताज की सफाई करना फिजूल है। बता दें कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में आगरा सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है।
दिल्ली से ही दूषित है यमुना
4 जून ओखला वजीराबाद मथुरा विश्राम घाट ताजमहल पेयजल मानक
बीओडी 11.2 5.53 6.80 17 2 से कम
डीओ -0.9 6.98 5.60 0.2 6 से ज्यादा
पीएच 7.06 7.9 7.3 7.5 6.5
कोलीफोर्म - - 1.13 लाख 7 लाख 50/100 मिली
कीड़ों ने हरा किया ताज तो भी गंभीर नहीं सरकार
यमुना में भारी प्रदूषण के कारण पहली बार काइरोनोमस फैमिली के कीड़े गोल्डी काइरोनोमस का हमला ताज पर 20 अप्रैल से होना शुरू हुआ, लेकिन ठीक 45 दिन बाद भी राज्य सरकार यमुना नदी में कीड़ों के पनपने की मुख्य वजह को दूर नहीं कर पाई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण केमिकल ब्रांच, वाडिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालॉजी, देहरादून और आईआईटी कानपुर जैसे तकनीकी संस्थान यमुना में भारी प्रदूषण को कीड़ों के हमले का जिम्मेदार बता चुके हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट मानिटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की। एनजीटी तीन बार उत्तर प्रदेश सरकार को यमुना नदी में सफाई करने की हिदायत देने के साथ फटकार भी लगा चुका है। एनजीटी में इस मामले की सुनवाई जुलाई महीने में है।
‘आगरा के लोगों को सीवर का पानी पिलाया जा रहा है। यहां हवा जहरीली है, लेकिन अफसर कागजी प्रतिबंध लगाने के अलावा प्रदूषण रोकने की दिशा में गंभीर नहीं है। सर्वोच्च अदालत तक को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में आगरा और ताजमहल का भविष्य संकट में है।’
डीके जोशी, याचिकाकर्ता