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विराेध्ा बेकार, कई मकान जमींदोज

Fri, 14 Aug 2015 01:38 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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छावनी परिषद के अधिकारियों ने गुरुवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर चंद घंटों में कई मकानों को जमींदोज कर दिया। दर्जनों लोग बेघर हो गए हैं। अब इनके सामने समस्या है कि बारिश के मौसम में आखिर ये कहां जाएं।
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सुबह 10.15 बजे छावनी अधिकारी, सेना, सीएमपी, सिविल पुलिस के साथ सबसे पहले सुल्तानपुरा बाजार पहुंचे। फोर्स देखकर लोगों में खलबली मच गई। जेसीबी ने जैसे ही मकान 83 को ढहाना शुरू किया तो महिलाएं अफसरों से उलझ गईं। मकान तोड़ने का विरोध किया। समझाने पर भी नहीं मानने पर पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। बाद में अवैध निर्माण को तोड़ दिया। अफसरों ने नियमों का हवाला देते हुए कई मकान ढहा दिए। सुल्तानपुरा के बाद टीम शिवहरे रोड स्थित बंगला नंबर 46 में पहुंची। यहां त्रिभुवन नारायण, प्रयाग नारायण और शिव नारायण के मकान पर जेसीबी चलाई गई। पूरा परिवार बाहर आ गया। थोड़ी देर पहले तक जिस घर में हंसी खुशी थी, चंद पलों में ही उनके सिर से छत छिन गई। सुबह से किसी भी परिवार का चूल्हा तक नहीं जला।

कैसे होंगे बेटी के हाथ पीले
त्रिभुवन नारायण की बेटी पूनम गुप्ता की 12 फरवरी की शादी है। लोग शादी की तैयारियों में जुटे थे। मकान चले जाने के बाद परिवार को बेटी की शादी की चिंता सताने लगी है। पूनम की मां कांता गुप्ता सदमे में हैं। कहा, इतनी जल्दी घर और शादी की तैयारियों का इंतजाम कैसे कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि पूनम के पिता को दो बार हार्ट अटैक पड़ चुका है। बेटी ही घर का खर्चा चला रही है।
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वापस आए बच्चों को नहीं मिला घर
गुरुवार सुबह बच्चे स्कूल चले गए। जब लौटे तो सिर से छत छिन चुकी थी। टूटे मकानों को देखकर घरवालों के साथ वे भी रोने लगे। भूख प्यास से बिलखने लगे। कक्षा 12 में पढ़ रही काजल ने कहा कि अब हम मकान कैसे बनाएंगे। हम इतने पैसे वाले नहीं। सिर छुपाने को जो छत थी, उसे भी छीन लिया है। कक्षा दसवीं की छात्रा साक्षी ने बताया कि सुबह स्कूल जाते वक्त नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा हो जाएगा।
 
- अधिकारी गरीबों की झोपड़ी तो तोड़ देते हैं, लेकिन अमीरों के बंगलों में झांकने तक नहीं जाते। कई ऐसे बंगले बने हैं, जिसमें अवैध निर्माण है। अधिकारी रसूखवालों से नजरें तक नहीं मिलाते।
डा. पंकज महेंद्रू, उपाध्यक्ष, छावनी

- केंद्रीय राज्यमंत्री डा. राम शंकर कठेरिया दुकानदारों की पैरवी के लिए दिल्ली में व्यापारियों को रक्षा मंत्री से मिलाते हैं। लेकिन गरीबों की पैरवी करने का उनके पास वक्ता नहीं। बात चाहे संत रविदास नगर की हो या फिर बंगला नंबर 46 में रह रहे गरीबों की।
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वीर बहादुर, आरटीआई एक्टिविस्ट
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