आगरा। ई-रजिस्ट्री के विरोध में हड़ताल से तहसीलों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। नौ दिन में करीब 3000 दस्तावेज रुके हैं और 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन अटक गया है। बुधवार को अधिवक्ताओं ने सदर तहसील में अर्धनग्न होकर विरोध-प्रदर्शन किया। इस नई व्यवस्था को वापस लेने के नारे भी लगाए गए।
अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर्स और टाइपिस्ट 16 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। लोग रजिस्ट्री, वसीयत से लेकर सत्यापित नकल, भारमुक्त प्रमाणपत्र, विवाह पंजीकरण आदि के लिए परेशान हैं। उन्हें कलेक्ट्रेट से दीवानी तक दौड़ लगानी पड़ रही है। मुकदमों की पैरवी से लेकर दाखिल-खारिज तक बंद पड़े हैं। सदर तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा ने कहा कि सरकार ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को वापस लेगी, तभी हड़ताल खत्म होगी।
बार महासचिव अरविंद दुबे ने बताया कि पिछले नौ दिन में हड़ताल के कारण सरकार को 40 से 50 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति हो चुकी है। 3000 हजार से अधिक बैनामा, वसीयत, इकरारनामा पंजीकरण के इंतजार में धूल फांक रहे हैं। संपत्तियों की खरीद-फरोख्त नहीं होने से करीब 10 हजार करोड़ का लेनदेन अटका है।
सदर तहसील में चार उप निबंधक, सहायक सहायक निरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक कार्यालय हैं। इसके अलावा फतेहाबाद, किरावली, एत्मादपुर, खेरागढ़ और बाह में भी निबंधन एवं राजस्व कार्य ठप है। बैनामा विशेषज्ञ सत्य प्रकाश धाकरे ने बताया कि प्रतिदिन 250 से 300 दस्तावेज पंजीकरण के लिए आते हैं। औसतन बैनामा 20 लाख रुपये का होता है। करीब 10 हजार करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
दस्तावेज लेखक संघ अध्यक्ष राम उपाध्याय ने बताया कि जिन लोगों ने संपत्तियों के सौदों में बयाना दे रखा है, उनका बयाना फंस गया है। सिकंदरा निवासी राजेश ने बताया कि वह विवाह पंजीकरण के लिए सात दिन से चक्कर लगा रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में गोविंद शरण, राजकुमार सक्सेना, दिव्यांश पांडेय, मनोज कुमार, वैभव शर्मा, विष्णु गौड़, मदन रावत, श्रीकृष्ण दीक्षित, जगन प्रसाद तेहरिया, आशा रानी, शिव नंदन, जगदीश प्रसाद, श्याम सुंदर शर्मा आदि मौजूद रहे।
हो रही राजस्व क्षति
- ई-रजिस्ट्री व्यवस्था प्रदेश में सिर्फ सात जगहों पर लागू है। आगरा में अभी लागू नहीं। हड़ताल के कारण काम ठप पड़ा है। राजस्व क्षति हो रही है। शासन को प्रतिदिन सूचना भेजी जा रही है।- योगेश कुमार, सहायक महानिरीक्षक निबंधन