देश की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन-18 का तीसरा ट्रायल दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से आगरा कैंट स्टेशन तक सफल ट्रायल किया गया। ट्रेन 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी। ट्रेन की रफ्तार देखकर लोग दंग रहे।
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पलवल से आगरा कैंट के बीच की दूरी महज 60 मिनट में तय कर ली। ट्रेन के आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचने पर आगरा रेल मंडल के अधिकारियों ने लोको पायलट और संरक्षा आयु्क्त का स्वागत किया। दोपहर 3.25 बजे ट्रेन वापस दिल्ली रवाना हो गई।
देश की पहली इंजन रहित ट्रेन-18 का तीसरा सफल ट्रायल सफदरगंज स्टेशन (दिल्ली) से गुरुवार दोपहर 12.30 बजे शुरू हुआ। पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन का ट्रायल करने वाले लोको पायलट दिल्ली के पंकज कुमार गर्ग ने चालक दल के अन्य सदस्यों के साथ ट्रेन दौड़ाई।
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181 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी
कैंट स्टेशन पर खड़ी ट्रेन-18
- फोटो : अमर उजाला
गाड़ी की औसतन गति 176 किमी प्रति घंटे रही, जबकि चालक दल के सदस्यों ने बताया कि ट्रेन 181 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी दौड़ाई। ट्रेन 18 का पहला ट्रायल मुरादाबाद-नजीबाबाद के बीच 115 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से किया गया।
दूसरा ट्रायल कोटा-सवाई माधोपुर के बीच 180 किमी की रफ्तार से हुआ था। ट्रायल के दौरान ट्रेन में संरक्षा आयुक्त, दिल्ली रेलवे बोर्ड के अधिकारी भी मौजूद रहे। चालक दल के सदस्यों में लोको पायलट पंकज गर्ग, सीएलआई ईश्वर सिंह, अयूब अली, महावीर सिंह व विद्यासागर शामिल रहे।
ट्रेन दोपहर 2.18 बजे आगरा कैंट के प्लेटफार्म नंबर एक पर रुकी तो डीआरएम रंजन यादव, एडीआरएम डीके सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया। लोको पायलट पंकज कुमार गर्ग ने बताया कि मेक इन इंडिया का बेहतरीन उदाहरण है यह ट्रेन। यह गतिमान का अपग्रेड वर्जन है। ट्रायल का अनुभव शानदार रहा।
ट्रायल के दौरान ट्रेन के संचालन में आईं छिटपुट खामियों को नोट किया गया। रेलवे अधिकारियों की मानें तो ट्रेन-18 का विधिवत संचालन 29 दिसंबर से दिल्ली से वाराणसी के बीच किया जाएगा। यह ट्रेन दिल्ली से दोपहर 2.30 बूजे चलकर टूंडला वाया कानपुर होकर रात्रि 10.30 बजे वाराणसी पहुंचेगी। कुंभ मेले के तीर्थयात्रियों को इस ट्रेन का संचालन होने से बड़ा फायदा होगा।
एक शीशा टूटा, हड़कंप मचा
ट्रेन-18 पर ट्रायल के दौरान दिल्ली से पलवल सेक्शन के बीच किसी ने पत्थर फेंक दिए, जिससे एक विंडो का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि चालक दल के सदस्यों ने कहा कि शीशा कैसे चटका, जानकारी नहीं हो सकी।
लग्जरी सुविधाएं हैं ट्रेन में
सफेद और नीले कोचों वाली अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन-18 पूर्णत: वातानुकूलित है। 16 कोच वाली इस ट्रेन के कोच नंबर आठ और नौ एग्जीक्यूटिव क्लास के हैं। हर कोच में चार एलईडी लगे हैं, जिन पर लाइव प्रसारण देख सकते हैं।
आटोमैटिक दरवाजे, स्लाइडिंग फुटस्टेप हैं, जिनसे प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच गैप नहीं रहता है। बटन दबाने पर दरवाजे खुलेंगे और आप्टिकल सेंसर लगे हैं। नाश्ते के लिए फोल्डेड टेबल्स लगी हुई हैं।