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मशरूम उत्पादन में हाथ आाजमाएंगीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

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मैनपुरी/बिछवां। जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशरूम उत्पादन को रोजगार के रूप में विकसित किया गया है। इसी के तहत अब सुल्तानगंज ब्लॉक में संचालित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी मशरूम उत्पादन में हाथ आजमाएंगी। इसके लिए बुधवार को ब्लॉक सभागार में 100 महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिकों ने उन्हें इसकी बारीकियां बताईं।
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उन्हें ऑयस्टर मशरूम के उत्पादन की पूरी जानकारी दी गई। उप कृषि निदेशक दुर्विजय सिंह ने महिलाओं को मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त ढांचे और स्थान की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने मशरूम की बुवाई से लेकर क्रॉप कटिंग तक विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि मशरूम की बुवाई के बाद 20 से 25 दिन में कटिंग शुरू हो जाएगी, जो 50 से 60 दिन चलेगी। उन्होंने मशरूम की बुवाई के लिए तैयार किए जाने वाले पैकेट के बारे में भी बताया।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल चौधरी ने कहा कि मशरूम में प्राकृतिक रुप से विटामिन डी की मात्रा होती है, इसलिए मशरूम भोजन और दवा दोनों के रूप में उपयुक्त है। इस दौरान महिलाओं के सवालों का भी उन्होंने समाधान किया। प्रशिक्षण में खंड विकास अधिकारी धीरेंद्र कुमार, डॉ. विशाल सिंह, नरेंद्र कुमार वर्मा, जिला मिशन प्रबंधक प्रदीप कुमार, राजकुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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बीते वर्ष किशनी ब्लॉक में दिया गया था प्रशिक्षण
मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिलाने की ये पहल बीते वर्ष शुरू हुई थी। मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर सबसे पहले किशनी ब्लॉक में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। यहां ग्राम पंचायत कुरसंडा की 150 महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाया गया था। इसके बाद महिलाओं ने मशरूम उत्पादन भी किया था। अब वे भी इस बार मशरूम की बुवाई करेंगी।
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