सातवीं बार नापजोख, छह विभागों की संयुक्त टीम दो दिन करेगी सीमांकन
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर यमुना के डूब क्षेत्र की फिर से नापजोख शुरू की गई। मंगलवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, केंद्रीय जल आयोग, सिंचाई विभाग, जल निगम, आगरा विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम ने पोइया घाट से नदी के डूब क्षेत्र का फिर से निर्धारण शुरू किया। सेटेलाइट के पुराने इमेज के आधार पर टीम ने निशान लगाए और मुड्डियां लगवाईं।
यमुना के डूब क्षेत्र के सातवीं बार सीमांकन के लिए आई एक्सपर्ट की टीम ने दोपहर एक बजे से पोइया घाट पर सर्वे शुरू किया। एनजीटी में याचिकाकर्ता की आपत्ति के बाद बेंच ने सरकारी विभागों को सीमांकन पर फटकार लगाई थी। इसके बाद संयुक्त टीम ने नदी के अपस्ट्रीम में पोइया घाट से लेकर गणपति वंडर सिटी तक दो किमी क्षेत्र में उन जगहों पर मुड्डियां लगाई, जहां साल 2010 में बाढ़ का पानी आ गया था। सेटेलाइट इमेज से कोआर्डिनेट लेकर नए सिरे से यह सीमांकन किया जा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के विशेषज्ञों ने राज्य सरकार के विभागीय अधिकारियों के साथ नदी किनारे के उन स्थानों को चिह्नित किया, जहां बाढ़ का पानी भर गया था। इन सात सालों में डूब क्षेत्र में बिल्डरों ने मलबा डालकर उसे ऊंचा कर दिया लेकिन सेटेलाइट के पुराने इमेज के आधार पर टीम ने निशान लगाए और मुड्डियां लगवाईं।
यह टीम नगला तल्फी में चिकित्सक के फार्म हाउस पहुंची, जहां फार्म हाउस के अंदर पुरानी मुडिड्यां लगी मिलीं। यह टीम दो दिन तक आगरा में रहकर डूब क्षेत्र का नए सिरे से सीमांकन करेगी। इसके लिए नई तकनीक का प्रयोग किया गया है। सूत्रों के मुताबिक साल 2010 की बाढ़ के आधार पर डूब क्षेत्र के सीमांकन में कई निर्माण आएंगे, जिससे बिल्डरों की मुसीबत और बढ़ सकती है।