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इंसानियत शर्मसार: खून से सनी सड़क पर तड़पती मासूम, किसी ने नहीं की मदद; चालक की वजह से चली गई नैना की जान

Thu, 12 Mar 2026 09:46 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में तेज रफ्तार स्कूल बस के टूटे फर्श से गिरकर छात्रा नैना गंभीर रूप से घायल हो गई। चालक उसे सड़क पर तड़पता छोड़कर भाग गया और इलाज न मिलने से आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
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नैना का फाइल फोटो और विलाप करते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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स्कूल में पढ़ाई कर बस से लौट रही नैना को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्पीड ब्रेकर पर वह उछली और टूटे फर्श से होते हुए सड़क पर गिर गई। पीछे सीट पर बैठी बहन परी के चीखने पर चालक ने दूर जाकर ब्रेक लगाया। वह लहूलुहान, तड़पती नैना को सड़क पर ही छोड़कर भाग गया। आधे घंटे तक इलाज न मिलने से बच्ची की मौत हो गई। घटना से परिवार में कोहराम मचा है। मां सोनम देवी और पिता ब्रह्मजीत के आंसू नहीं रुक रहे हैं।
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नैना की मौत के बाद बहन परी और भाई कान्हा लगातार रो रहे थे। उन्हें नहीं पता था कि उनकी आंखों के सामने जान चली जाएगी। भाई-बहन ने बताया कि वह सभी बस में अलग-अलग सीट पर बैठे थे। चालक बस को तेज गति से चल रहा था। स्पीड ब्रेकर पर उसने अचानक बस को धीमा कर दिया। इससे नैना सीट से उछली, बस के फर्श पर लगा पट्टा हट जाने से वह सड़क पर जा गिरी। जब वो चीखे तो चालक ने काफी दूर जाकर ब्रेक लगाया। नैना आधा घंटे तक नैना तड़पती रही। जब तक कर्मचारी आकर बाइक से उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना के बाद से परिजन और ग्रामीणों में आक्रोश है।

बनना चाहती थी डॉक्टर
पिता ब्रह्मजीत ने बताया कि वह दोनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर ऊंचे मुकाम पर पहुंचाना चाहते थे। नैना डॉक्टर बनना चाहती थी। वह गांव में जब भी बीमार लोगों को देखती थी तो उनसे कहती थी कि वो डॉक्टर बनेगी। सबका इलाज करेगी।
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बिना रजिस्ट्रेशन-परमिट के दौड़ रही थी बस
 नौनिहालों को स्कूल लेकर जा रहे वाहन कितने सुरक्षित हैं, इस हादसे ने हकीकत सामने ला दी। आरटीओ और पुलिस के अधिकारी खानापूर्ति करते नजर आए। एत्मादपुर पहुंची आरटीओ की टीम बस का रिकॉर्ड खंगालती रही। मगर आरबीएस हायर सेकंडरी स्कूल के नाम से कोई बस पंजीकृत नहीं मिली। चालक के बारे में भी जानकारी नहीं मिली। केवल यही पता चला कि चालक एत्मादपुर निवासी नरेंद्र सिंह है। अब उसके लाइसेंस को निरस्त करने की बात कही जा रही है।

स्कूल बस से हुए हादसे के बाद पुलिस और आरटीओ की टीम ने जांच की। शुरुआती जांच में सामने आया कि स्कूल बस पिछले 13 साल से चल रही है। संचालक ने बस का परमिट भी नहीं लिया। उसका स्कूल बस के रूप में आरटीओ में कोई रिकॉर्ड नहीं है। बस काफी जर्जर हो गई थी। बस के रजिस्ट्रेशन के बारे में नहीं पता चला है। बस मालिक और एजेंसी संचालक के बीच विवाद हुआ था। मामला उपभोक्ता आयोग में चला गया था। विद्यार्थियों के परिजन ने पुलिस को बताया कि बस आए दिन खराब हो जाती थी। जगह-जगह फर्श भी टूटा था। इस बारे में चालक नरेंद्र को कई बार टोका वो हर बार यही कहता था कि बच्चे सुरक्षित हैं। किसी तरह की परेशानी नहीं है।


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