परिषदीय बेसिक स्कूलों से विद्यार्थियों का पलायन भला कैसे रुके। शैक्षणिक माहौल की बात दूर, स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने तक के इंतजाम नहीं है। बल्केश्वर के राधानगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में महज एक छोटी सी कोठरी है। इस पर टिन शेड पड़ा है। यह भी विद्यार्थियों के बैठने के लिए नहीं, इसमें टूटे फर्नीचर आदि पड़े हैं। विद्यार्थी खुले में बैठते हैं। बारिश होने पर स्कूल बंद हो जाता है।
शनिवार को स्कूल खुलने पर महज पांच छह विद्यार्थी पहुंचे। यहां प्रधानाध्यापक और एक सहायक अध्यापिका तैनात हैं। कई सत्रों से विद्यालय का संचालन खुले आसमान के नीचे हो रहा है। 45 विद्यार्थियों के पंजीकरण के अनुपात में उपस्थिति 25 फीसदी भी नहीं रहती। जमीन का भी विवाद चल रहा है। तीन-चार महीने पहले बाउंड्रीवाल का गेट तोड़ दिया गया। एफआईआर दर्ज कराई। अभी तक विभाग गेट तक नहीं लगवा सका। विद्यार्थियों का अन्य किसी विद्यालय में समायोजन तक नहीं किया जा रहा।
‘शासन की अनुमति के बिना विद्यार्थियों का किसी और विद्यालय में समायोजन नहीं किया जा सकता। शासन को इसके लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।’
- धर्मेंद्र कुमार सक्सेना, बेसिक शिक्षा अधिकारी
पुरानी किताबें लेकर पहुंचे विद्यार्थी
गर्मी की छुट्टी खत्म होने के बाद शनिवार को परिषदीय बेसिक स्कूल खुल गए। विद्यार्थी कम संख्या में पर पहुंचे। कुछ के बैग में पुरानी किताबें और कुछ के पास वे भी नहीं थी। सर्व शिक्षा अभियान के तहत अभी तक किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो जुलाई अंत तक या अगस्त के पहले सप्ताह में नई किताबें विद्यार्थियों को मिलेंगी।