आगरा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और शैक्षणिक पंचांग के अनुसार पढ़ाई कराने के उद्देश्य से डीआईओएस ने शुक्रवार को जीआईसी में वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों की बैठक बुलाई थी।
इसमें डीआईओएस के सामने ही वित्त विहीन विद्यालयों के प्रबंधक और जीआईसी के शिक्षक भिड़ गए। धक्का-मुक्की तक हुई। बैठक में काफी देर तक हंगामा होता रहा।
डीआईओएस रवींद्र सिंह राजकीय और एडेड विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की तरह वित्तविहीन विद्यालयों के प्रतिनिधियों का उत्साहवर्धन करना चाह रहे थे। शुरू से माहौल बन नहीं पाया।
स्कूल प्रबंधकों ने लगाए आरोप
प्रबंधकों ने समस्याएं बतानी शुरू कर दीं। आरोप लगाया कि वित्तविहीन विद्यालयों के साथ सही व्यवहार नहीं किया जाता। यह भी कहा कि जीआईसी में कर्मचारियों और शिक्षकों की ओर से परीक्षा कार्य के लिए अवैध वसूली की जाती है।
इस बात का हाल में खड़े जीआईसी के शिक्षकों ने विरोध कर दिया। डीआईओएस के सामने ही स्कूल प्रबंधकों और जीआईसी के शिक्षकों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देर तक हंगामा होता रहा।
इस सबके बीच में डीआईओएस वहां से चले गए। कुछ शिक्षकों और प्रबंधकों के बीच बचाव से मामला शांत हुआ। बैठक में डीआईओएस टू राजेंद्र बाबू, एडीआईओएस सुभाष बाबू, जीआईसी के प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह मौजूद रहे।
'इन शिक्षकों से ही शिक्षण कार्य लिया जाए'
घटनाक्रम के बाद राजकीय शिक्षक संघ की आपात बैठक जीआईसी में हुई। इसके बाद संघ के पदाधिकारियों ने डीआईओएस को पत्र लिखकर बैठक में हुए घटनाक्रम पर रोष जताया गया।
संघ ने मांग की है कि भविष्य में उनसे शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई कार्य न लिया जाए। बैठक में संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, मंडलीय मंत्री चंद्रवीर सिंह, संरक्षक डॉ. जनक सिंह, जिलाध्यक्ष विश्वंभर दयाल पाराशर आदि मौजूद रहे।
वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों ने जिले में संचालित गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की। आरोप लगाया कि ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर कार्रवाई नहीं की जाती। विद्यालयों से रुपये ले लिए जाते हैं।