कासगंज। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े सहावर को अब बढ़ी सौगात मिलने की उम्मीद जाग गई है। कस्बे के समीप ही अब राजकीय महाविद्यालय खोले जाने की तैयारी अल्प संख्यक विभाग ने की है। महाविद्यालय के लिए भूमि चिह्नित कर ली और 11.50 करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है। शीघ्र ही स्वीकृति मिलने की संभावना विभाग ने जताई है।
कासगंज जिला उच्च एवं चिकित्सा के क्षेत्र में पिछड़े इलाकों में गिना जाता है। क्योंकि यहां बेहतर शिक्षा संस्थानों की सदैव जरूरत दिखाई देती रही है। निजी शिक्षण संस्थान तो काफी हैं लेकिन उच्च शिक्षा का सरकारी संस्थान एक मात्र राजकीय महाविद्यालय नौरथा है। जबकि सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों की काफी आवश्यकता है। इस दिशा में अब बेहतर कदम अल्प संख्यक विभाग की ओर से उठाया गया है।
अल्प संख्यक विभाग ने सहावर क्षेत्र में अब उच्च शिक्षा के लिए मजबूत योजना बनाई है। यहां राजकीय महाविद्यालय खोला जाएगा। इसके लिए कस्बे के समीप ही भूमि चिह्नित कर ली है। इस भूमि पर 11.50 करोड़ रुपये की संभावित लागत प्रस्तावित कर प्रस्ताव पिछले ही दिनों शासन को भेज दिया गया है, शीघ्र ही शासन इस पर विचार सकता है। क्योंकि अल्पसंख्यक विभाग ने स्थानीय स्तर पर महाविद्यालय के लिए सभी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली हैं।
दान की जमीन पर होगा निर्माण
अल्प संख्यक विभाग की ओर से जो प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उसमें जमीन का पूरा ब्यौरा दिया गया है। यह जमीन एक संस्था की है। संस्था ने इस जमीन पर महाविद्यालय निर्माण की सहमति दे दी है।
आंकड़े की नजर से
1 हेक्टेअर क्षेत्रफल जमीन की गई है चिह्नित
60 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार से मिलने की उम्मीद
40 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार से मिलने की विभाग जता रहा उम्मीद
माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल
अल्पसंख्यक विभाग ने माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल की है। विभाग ने शासन को सुझाव भेजा है कि जिले में अमांपुर सोरों सहित किन्हीं दो अन्य ब्लॉकों में राजकीय बालिका इंटर कालेज खोले जाएं तो निश्चित ही माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर सुधार के नतीजे सामने आएंगे। इधर विभाग ने स्थानीय स्तर पर जिले में राजकीय बालिका इंटर कालेज के लिए जमीन की तलाश शुरू की है।
वर्जन:
महाविद्यालय में सहावर में भूमि चिह्नित कर शासन को 11.50 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों का सुझाव भेजा है। स्थानीय स्तर पर जीजीआईसी के निर्माण के लिए जमीन तलाश रहे हैं। - सुरेश कुुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।