शिक्षा विभाग की ओर से सत्र की शुरुआत में ही शत-प्रतिशत पाठ्यपुस्तक वितरण का दावा किया गया था। क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों में स्थिति इसके उलट है। किताबों की उपलब्धता न होने से अभिभावक भी परेशान हैं। अभिभावक सुशील कुमार का कहना है कि सरकार स्कूल चलो अभियान के माध्यम से बड़े-बड़े दावे कर रही है, धरातल पर मूलभूत सुविधाओं का अकाल है। बाजार में ये पुस्तकें मिलती नहीं और स्कूल से अब तक मिली नहीं। बिना किताबों के बच्चों का पाठ्यक्रम लगातार पिछड़ रहा है।
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के जिला महामंत्री राजीव वर्मा ने बताया कि कई विद्यालयों में किताबों की आंशिक आपूर्ति तो हुई है, लेकिन अधिकांश विषयों की पुस्तकें अब तक नहीं मिली हैं। जब तक हर विषय की किताब बच्चे के हाथ में नहीं होगी, तब तक शिक्षण कार्य प्रभावी नहीं हो सकता।