आगरा में अनुसूचित जाति के संगठनों ने रविवार को महापंचायत कर छात्रा संजलि को जिंदा जलाने की घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। पुलिस के खुलासे की कहानी पर सवाल उठाते हुए एलान किया गया है कि अगर केंद्रीय एजेंसी से जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन किया जाएगा। सरकार से संजलि के परिवार को एक करोड़ रुपया मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी की गई है।
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बुद्ध विहार चक्की पाट स्थित आंबेडकर भवन में आयोजित पंचायत में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनैतिक दलों के पदाधिकारी पहुंचे। सभी ने एक साथ कहा कि पुलिस ने घटना का सही खुलासा नहीं किया है। संजलि का परिवार भी पुलिस की कहानी से संतुष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि 24 दिसंबर को संजलि हत्याकांड के विरोध में आगरा बंद का आह्वान किया गया था। पुलिस ने इसी से डरकर आनन फानन में उल्टा सीधा खुलासा कर दिया जो समाज के गले नहीं उतर रहा है।
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'सीबीआई ही सच सामने ला सकती है'
संजलि को न्याय दिलाने की मुहिम
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि सीबीआई ही दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है। भीम नगरी आयोजन की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष भरत सिंह की अध्यक्षता में यह पंचायत की गई थी। संचालन धर्मपाल सिंह ने किया।
महापंचायत में पूर्व मंत्री अजय शील गौतम, पूर्व विधायक कालीचरन सुमन, पूर्व श्याम जरारी, शिव चरन कश्यप, मनोज सोनी, विजय बहादुर सिंह, चौधरी शिव नारायण जरारी, देवी प्रसाद, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के दीवान सिंह मुखिया, श्याम भोजवानी मौजूद रहे।
बोले लोग, अपनी जान बचाने के लिए लगाया परिवार पर कलंक
महापंचायत में पूर्व विधायक कालीचरन सुमन, कांग्रेस नेता उपेंद्र सिंह समेत कई लोगों ने कहा कि पुलिस के पास खुलासे के लिए पुख्ता सुबूत नहीं थे। पुलिस अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा था। ऐसे में पुलिस ने अपनी जान बचाने के लिए ऐसा खुलासा किया कि संजलि के परिवार पर ही कलंक लग गया।
संजलि नहीं पहचान पाई तो पुलिस ने कैसे पहचाना
संजलि हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
महापंचायत में पुलिस के खुलासे की कहानी पर सवाल उठाए गए। लोगों ने कहा कि पुलिस के पास जो सीसीटीवी फुटेज हैं, उनमें एक में भी किसी का चेहरा नजर नहीं आ रहा है। हेलमेट लगाए लोगों में से एक को योगेश और दूसरे को विजय बताया जा रहा है। जब संजलि हत्यारों को इस कारण से नहीं पहचान पाई कि उन्होंने हेलमेट लगाए थे। तो फिर पुलिस ने हेलमेट के अंदर के चेहरों को कैसे पहचान लिया।
यह था खुलासा
संजलि को 18 दिसंबर को जिंदा जलाया गया था। 19 की रात दो बजे उसने दम तोड़ा था। 20 को उसके तहेरे भाई योगेश ने जहर खाकर जान दे दी। 24 को पुलिस ने खुलासा किया कि योगेश ने ही संजलि को जलाया था। योगेश के ममेरे भाई विजय और विजय की बहन के देवर आकाश ने उसका साथ दिया।
संजलि की मां अनीता ने कहा कि वो खुलासे से संतुष्ट नहीं है। पुलिस ने कोई साक्ष्य हमारे सामने नहीं रखा है। हम सीबीआई जांच चाहते हैं। तभी सच सामने आ पाएगा। वहीं आरोपी योगेश के पिता शेर सिंह का कहना है कि पुलिस कह रही कि योगेश घर से लाइटर ले गया था, जबकि हमारे घर में लाइटर था ही नहीं। पुलिस की कहानी पर जरा भी यकीन नहीं है।
रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर वीर बहादुर सिंह ने कहा कि परिवार के लोग पुलिस के खुलासे से संतुष्ट नहीं हैं तो संजलि को जिंदा जलाने वाले वास्तविक मुल्जिम कौन हैं? पुलिस कभी दफा राजनीतिक दबाव में खुलासे कर देती है। मैं भी 15 साल विभिन्न थानों में बतौर इंस्पेक्टर तैनात रहा हूं। संजलि के परिवार के लोग सुबूत मांग रहे हैं।