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चार हजार का कूड़ादान, 12 हजार का भुगतान

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आलीपुर खेड़ा में प्राथमिक विद्यालय में रखा कूड़ादान। - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के लिए लगवाए गए कूड़ेदानों में करोड़ों का घोटाला हुआ है। मामला खुलने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। जिले में सोमवार को विजिलेंस टीम ने करोड़ों के घोटाले की जांच के लिए दस्तक दी है। टीम यहां 552 ग्राम पंचायतों में लगे कूड़ेदानों की गुणवत्ता और भौतिक सत्यापन करेगी। साथ ही प्रधान और पंचायत सचिवों से भुगतान की जानकारी लेगी।
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बीते वर्ष ग्राम पंचायतों में लगवाए गए कूड़ेदानों में चार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। प्राथमिक जांच में घोटाला सामने आने के बाद डीएम की संस्तुति पर तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह को निलंबित कर जांच बैठा दी गई थी। बाद में शासन ने ये जांच विजिलेंस आगरा को सौंपी दी। विजिलेंस टीम के मैनपुरी पहुंचने के बाद पंचायत राज विभाग में हड़कंप मच गया है। टीम केवल कूड़ेदान ही नहीं बल्कि विजिलेंस टीम वर्ष 2018-19 में बने अंत्येष्टि स्थल और शौचालयों की भी जांच कर रही है। ग्राम पंचायतों को तो अब तक इस बात की खबर भी नहीं है कि कूड़ेदानों और शौचालयों की जांच के लिए विजिलेंस टीम भी आई हुई है।
बीते वर्ष सभी ग्राम पंचायतों में स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, सार्वजनिक स्थल व अन्य जरूरी स्थानों पर कूड़ेदान लगवाने के लिए शासन से आदेश दिया गया था। एक शिकायत के आधार पर जब तत्कालीन डीएम प्रदीप कुमार ने जांच कराई तो पता चला कि बाजार में जो कूड़ेदान महज चार हजार रुपये में उपलब्ध था, उसकी खरीद का भुगतान 12 हजार रुपये किया गया। 552 ग्राम पंचायतों में हर में औसतन दस कूड़ेदान लगवाए गए हैं। ऐसे में अनुमान के अनुसार लगभग सवा छह करोड़ रुपये कूड़ेदान पर खर्च किया गया। वहीं, जांच में इनकी मूल कीमत सवा दो करोड़ के आसपास थी। जांच में कूड़ेदान में चार करोड़ का घोटाला किया गया है।
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घोटाले में डीपीआरओ पर गिरी थी गाज
मार्च 2019 में जब कूड़ेदान का घोटाला खुला तो तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह को खुद प्रमुख सचिव पंचायती राज अनुराग श्रीवास्तव ने निलंबित कर दिया था। अपर निदेशक पंचायती राज खुद निलंबन आदेश पत्र लेकर मैनपुरी आए थे। इसके बाद जांच के लिए अलीगढ़ मंडल के उप निदेशक पंचायत एसके सिंह को नामित किया था। लेकिन इसके बाद ये जांच विजिलेंस को सौंप दी गई।
शौचालय की भी मांगी सूची
पुलिस अधीक्षक विजिलेंस आगरा ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिखकर कूड़ेदान की जानकारी के साथ ही जिले में डीपीआरओ यतेंद्र सिंह की तैनाती के दौरान बनाए गए शौचालयों की भी सूची मांगी है। इससे कहीं न कहीं शौचालयों में भी घोटाले की आशंका बढ़ गई है।
लिपिकों को नहीं पता कितने लगे कूड़ेदान
सभी ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान लगवाए गए थे। डीपीआरओ के निलंबन के बाद अब किसी भी कर्मचारी को इसकी जानकारी भी नहीं है कि कितने कूड़ेदान जिले भर में लगाए गए थे। चाहे कार्यालय के बाबू हों या फिर जिला समन्वयक कोई भी इस बारे में नहीं बता पा रहा है।
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