मैनपुरी। आर्यावर्त बैंक ब्योंती खुर्द में हुए घोटाले को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया था। इसके लिए ऋण खातों और बैंक के निजी खातों को निशाना बनाया गया था। इससे ये हुआ कि लंबे समय तक किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
वर्ष 2005 से 2013 के दौरान तत्कालीन शाखा प्रबंधक संदीप सिंह चौहान ने आर्यांवर्त बैंक ब्योंती खुर्द में घोटाले के लिए पूरी प्लानिंग की थी। इसी प्लानिंग के चलते सबसे पहले बैंक के ऋण खातों को निशाना बनाया गया। इससे ये हुआ कि ऋण खातों में जब भी कोई धनराशि जमा करने आता तो शाखा प्रबंधक उस धनराशि को खाते में जमा ही नहीं करते। इसके चलते ऑडिट आदि में ये मामला नहीं खुल सका। ऐसे 285 ग्राहकों के ऋण खातों को निशाना बनाया गया। वहीं बैंक के निजी खर्च के लिए आए 7.10 लाख रुपये भी हड़प लिए गए। लगातार कई सालों तक ये पूरा खेल चलता रहा। इस प्लानिंग का ही नतीजा रहा है कि शाखा प्रबंधक के स्थानांतरण के बाद भी किसी को लंबे समय तक मामले की जानकारी नहीं हो सकी। कुल 2.68 करोड़ के घोटाले से आर्यावर्त बैंक की अन्य शाखाओं में भी खलबली मच गई है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही जिले में संचालित अन्य शाखाओं में भी सत्यापन शुरू होगा।
खातों को भी किया अपने नाम
केवल खातों में जमा होने वाली धनराशि का ही तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने गबन नहीं किया, बल्कि कई खातों को भी अपने नाम कर लिया। इसके लिए लंबे समय से संचालित न होने वाले खातों को अपने नाम पर कर लिया गया।
खाते धारक क्यों नहीं आए सामने
तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने ग्राहकों को चूना लगाते हुए इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया, लेकिन सवाल ये है कि आखिर किसी खाताधारक ने सामने आकर मामले के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी। वहीं एक पहलू ये भी है कि क्या किसी खाताधारक को इस बात की जानकारी ही नहीं हुई कि उसके खाते में धनराशि जमा की जा रही थी या नहीं।