कासगंज में एक खेत खड़ी गन्ने की फसल फाइल फोटो
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कासगंज। दस्तावेजों में हेराफेरी कर गन्ना माफियाओं ने बड़ा फर्जीवाड़ा किया है। तहसील के दस्तावेजों से भी छेड़छाड़ कर हेराफेरी की कोशिश की गई है। जांच में कई रकबों में अब तक हेराफेरी सामने आई है। गन्ना विभाग अब दस्तावेजों से नहीं बल्कि गाटा संख्याओं से जांच कराएगा। इस तरह की जालसाजी करने वाले सैकड़ों माफिया अब तक चिह्नित किए जा चुके हैं।
जिले में न्यौली चीनी मिल होने के कारण बड़े क्षेत्रफल में गन्ने की फसल की पैदावार की जाती है। यहां तमाम गन्ना माफिया भी सक्रिय हैं, जो गंगा की जमीन पर गन्ने की पैदावार कर किसानों के नाम पंजीकरण कराकर फसल बेचते हैं। इससे रकबे में हेराफेरी हो जाती है और गन्ने की पैदावार का सही आकलन विभाग को नहीं मिल पाता। गन्ना आयोग की सख्ती के बाद गन्ना विभाग ने जांच की तो एक के बाद एक कलई खुलती जा रही है।
तहसील के दस्तावेजों से गन्ने की पैदावार और किसानों के पंजीकरण की स्थिति जानने पर हकीकत सामने आई है। विभाग पहले ही 1100 हेक्टेयर जमीन के पंजीकरण निरस्त कर चुकी है। इसमें पाया गया था कि माफियाओं ने सक्रियता दिखाते हुए गड़बड़ी की है। इसके बाद तहसील के दस्तावेजों से जांच शुरू कराई लेकिन दस्तावेजों से सही मिलान नहीं हो पा रहा है। दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों किसान और फर्जी पाए गए। ऐसे में विभाग ने खतौनी से नहीं बल्कि गाटा संख्या से जांच की तैयारी की है।
आंकड़े की नजर से-
- 11552 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना पैदावार कराएगा विभाग।
- 1000 से अधिक किसानों की निरस्त होगी गन्ना खरीद।
- 1000 से अधिक हेक्टेयर क्षेत्रफल में पाया गया है फर्जीवाड़ा।
- 600 से अधिक किसान अभी तक चिह्नित।
- गन्ना खरीद में बिचौलियों को सक्रिय नहीं होने दिया जाएगा। गांव-गांव पहुंचकर गन्ना विभाग के अफसर जांच कर रहे हैं। खतौनी से नहीं अपितु गाटा संख्या से जमीन का सत्यापन किया जाएगा।
ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।