बम-बम, हर-हर महादेव...जय शिव शंभू। कैलाश मंदिर में और आसपास यही जयकारे गूंजते रहे। भक्ति ऐसी कि कोसों दूर सोरों राजघाट से पैदल कांवड़ लाने पर भी दर्द और थकान का अहसास नहीं दिखा। रविवार-सोमवार की रात करीब 3 बजे मंगला आरती होते ही कांवड़ियों ने गंगाजल से नीलकंठ का अभिषेक किया।
सावन के तीसरे सोमवार के लिए रविवार शाम पूर्व विधायक रामप्रताप चौहान ने महाआरती कर कैलाश मेले का उद्घाटन किया। महंत ने मंत्रोच्चारण कर सभी के मंगल की कामना की। महंत सतीश गोस्वामी ने बताया कि मंदिर का पौराणिक महत्व है। भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि को महादेव से मिले शिवलिंग यहां स्थापित हैं। बाबा का विशेष शृंगार और फूलों की रंगोली सजाई गई। सोमवार को तड़के से ही कांवड़ियों ने कांवड़ चढ़ाई। अन्य भक्तों की भी भीड़ रही। कइयों ने दूध से महादेव का अभिषेक किया।
सजे झूले और स्टॉल, उमड़ी भीड़
कैलाश मेला 5 किमी की दूरी तक सजा है। इसके लिए गुरुद्वारा से ही भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। कई तरह के झूले, खाने की स्टॉल, खिलौनों की दुकान समेत अन्य स्टॉल लगी हैं। भजन और गीतों के लिए साउंड सिस्टम भी लगाए हैं। कई जगह भक्तों के लिए भंडारे भी लगे हैं। मेले की पूर्व संध्या से ही दूरदराज से लोग मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
मनोकामना के लिए लाए कांवड़
भक्ति और श्रद्धा के लिए कोई तर्क नहीं। हजारों की संख्या में सोरों से पैदल कांवड़ लेकर भक्त मंदिरों में पहुंचे। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। किसी ने बच्चे-परिवार की भलाई तो किसी ने गुप्त मनोकामना के लिए महादेव का जलाभिषेक किया। कई ऐसे भी भक्त रहे जो बीमारी से दूर रखने की भी कामना के लिए गंगाजल लाए।
105 लीटर की कांवड़ से जलाभिषेक
कांवड़ की टोली के सदस्य अंकित कुमार ने बताया कि सोराें से 105 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर आ रहे हैं। बीते कई वर्षों से ये क्रम चल रहा है। परिवार की भलाई और बिगड़े काम बनाने की मनोकामना है।
भोले बाबा की कृपा से बढ़ रहे कदम
ताजगंज के सुमित कुमार ने बताया कि 71 लीटर वजनी कांवड़ सोरों से पैदल लेकर आ रहे हैं। इसमें 10-12 सदस्य हैं। भोले के जयकारे-भक्ति के आगे भार का अहसास नहीं हो रहा। उनकी कृपा से ही मंदिर की ओर कदम बढ़ते जा रहे हैं।