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रूठा रहा सावन, किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

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खेत में सूख रही धान की फसल - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। बीते चार वर्षों में इस बार सावन (जुलाई) में सबसे कम बारिश हुई। इससे किसान परेशान हैं। ऐसे में धान की फसल में लागत बढ़ने के साथ ही उत्पादन प्रभावित होने की भी आशंका बढ़ती जा रही है।
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जिले में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती से जुड़े हुए हैं। खरीफ की फसल में धान का उत्पादन किसानों के लिए फायदेमंद होता है। इस बार धान की फसल किसानों के लिए मुश्किल बन गई है। दरअसल ये मुश्किल जुलाई में मानसून की बेरुखी से आई है। इस बार जुलाई में 145.91 मिमी बारिश हुई है, जबकि बीते वर्षों में ये आंकड़ा अधिक रहा है।
हालांकि पांच वर्ष की बारिश देखें तो सबसे अधिक बारिश वर्ष 2018 में दर्ज की गई थी। जिले में लगभग 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती किसान करते हैं। इससे एक लाख किसान जुड़े हैं, अगर बारिश नहीं हुई तो एक ओर सिंचाई का खर्च बढ़ेगा तो वहीं दूसरी ओर उत्पादन भी प्रभावित होगा।
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खरीफ में 250-300 मिमी होनी चाहिए औसत बारिश
बारिश के आंकड़ों को देखकर एक सवाल आता है कि आखिर औसतन सावन या जुलाई में बारिश कितनी होनी चाहिए। इस बारे में जब कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि जुलाई में लगभग 250-300 मिमी के बीच बारिश औसत मानी जाती है। इससे कम बारिश सूखा की ओर और अधिक बारिश बाढ़ जैसे हालातों को जन्म देती है।
किसानों पर बढ़ेगा बोझ
धान की फसल में अगर बारिश न हुई तो कम से कम दस बार सिंचाई करनी पड़ेगी। एक बार में एक बीघा धान की सिंचाई में लगभग दो सौ रुपये का खर्च आता है। ऐसे में दस बार में प्रति बीघा फसल की सिंचाई पर दो हजार रुपये का खर्च आएगा। वहीं धान का उत्पादन सात से आठ हजार रुपये प्रति बीघा तक ही होता है। इसमें बीज, जोताई, मजदूरी, उर्वरक सब शामिल हैं।
हाईलाइटर
-145.91 मिमी हुई जुलाई 2020 में बारिश
-153.4 मिमी हुई जुलाई 2019 में बारिश
-347.23 मिमी हुई जुलाई 2018 में बारिश
-219.04 मिमी हुई जुलाई 2017 में बारिश
-113.38 मिमी हुई जुलाई 2016 में बारिश
इस बार जुलाई में बीते वर्षों की अपेक्षा बारिश कम हुई है। अगर आगे अच्छी बारिश नहीं होती है तो धान के लिए परेशानी हो सकती है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार आगे बारिश होने की संभावना अभी बनी हुई है।
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डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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