भूतेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक करते भक्त (फाइल)
श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में भूतेश्वर महादेव, रंगेश्वर महादेव, पीपलेश्वर और गोकर्णनाथ महादेव नाम से चार प्रमुख शिव मंदिर हैं, जिन्हें ब्रज का कोतवाल कहा जाता है। ये शिव मंदिर मथुरा की चारों दिशाओं में हैं। सावन और शिवरात्रि के अवसर पर इन मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है। कोरोना काल में भी इन मंदिरों में आस्था का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है।
सावन माह के तीसरे सोमवार पर शिव मंदिरों में भगवान भोले के जयकारे गूंजेंगे। मंदिरों में सुबह दुग्धाभिषेक एवं पूजन-अर्चन तथा शाम को फूलबंगले सजाए जाएंगे। मथुरा नगरी के चारों दिशाओं में स्थित भूतेश्वर, रंगेश्वर, पीपलेश्वर, एवं गोकर्णनाथ के अलावा पीपलेश्वर, गर्तेश्वर और नीलकंठेश्वर महादेव मंदिरों में भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचेंगे।
महावन के चिंताहरण महादेव मंदिर, गोवर्धन के चक्लेश्वर, नंदगांव के आसेश्वर व नंदीश्वर आदि शिव मंदिरों में भक्त बेलपत्र, पुष्प, दूध, शहद, दही आदि से भगवान शिव का पूजन-अर्चन करेंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर के सेवायतों ने भक्तों की भीड़ को सुव्यवस्थित करने के लिए मंदिरों पर पुलिसबल की तैनाती की मांग की है।
दक्षिण में स्थित है भूतेश्वर महादेव मंदिर
भूतेश्वर महादेव मंदिर कृष्ण जन्मभूमि के दक्षिण में स्थित है। इसमें प्राचीन शिवलिंग एवं पाताल देवी के विग्रह हैं। बताया जाता है कि भूतेश्वर महादेव का प्राचीन शिवलिंग नाग शासकों ने स्थापित किया था। लोक श्रुति के अनुसार मधु दानव की पराजय के बाद मथुरा नगरी की स्थापना के समय भूतेश्वर महादेव की भी स्थापना की गई थी। यह भी मान्यता है कि यहां श्रीकृष्ण से भगवान भोलेनाथ मिलने आए थे।
भूतेश्वर महादेव मथुरा में चार महादेव मंदिर हैं, जो मथुरा नगरी के रक्षक माने जाते हैं। पूर्व में पीपलेश्वर, उत्तर में गोकर्णेश्वर, दक्षिण में रंगेश्वर महादेव और भूतेश्वर पश्चिम दिशा के कोतपाल माने जाते हैं। भूतेश्वर चौराहे पर स्थित इस मंदिर में जाए बिना श्रद्धालुओं की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती। इस मंदिर में मां काली, श्री पाताल देवी, श्री गिरिराज महाराज एवं अन्य सुंदर मंदिर स्थित हैं।