सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों में भक्तो की भारी उमड़ रही है। इस बार 150 साल बाद मरुस्थलीय नागपंचमी का दुर्लभ योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पारासर ने बताया कि 59 साल बाद श्रवणी नक्षत्र में सावन का पहला सोमवार पड़ा।
सोमवार को ही सर्वार्थ सिद्धि, अमृत और प्रीति योग होने से भोलेनाथ का अभिषेक कई गुना पुण्यफलदायी रहेगा। रुद्राभिषेक से संतान सुख की बाधा दूर होगी। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प और पितृ दोष है। अनुष्ठान करने से इसके प्रभाव से भी मुक्ति मिलेगी। राहु ग्रह का दोष भी कम होगा।
बटेश्वर मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि पहले सोमवार को दुर्लभ योग बनने की वजह से मथुरा और वृंदावन से यज्ञाचार्य यहां पहुंचे हैं। विभिन्न मंदिरों में अनुष्ठान की तैयारी पूरी कर ली गई है। शिव मंदिर श्रृंखला पर श्रद्धालुओं के पहुंचने और दर्शन पूजन का भी सिलसिला शुरू हो गया है।