कासगंज। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाए गए ठोस कदम पिछले दो साल से जिले में नया इतिहास रच रहे हैं, लेकिन इस बार पुराने रिकॉर्ड तोड़कर फिर एक नया इतिहास दोहराने की तैयारी की गई है। जिला प्रशासन ने एक नया वन स्थापित करने की तैयारी की है। हालांकि अभी इस वन का कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया गया है, लेकिन भूमि की तलाश कर ली गई है। खादर में अब तक 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि तलाशी जा चुकी है।
जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशासन और वन विभाग विशेष अभियान चला रहा है। पिछले दो सालों से तो ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। दो साल पहले सोरों क्षेत्र के चंदनपुर घटियारी में 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गंगावन स्थापित किया गया। इसमें 1.21 लाख पौधे रोपित किए गए ।
पिछले साल सोरों क्षेत्र के गांव दतलाना के समीप खादर की जमीन पर 315 हेक्टेयर क्षेत्रफल में भागीरथी वन स्थापित किया गया जिसमें 3.51 लाख पौधे रोपित किए गए । अब इन दोनों ही वनों से बड़ा एक और ऐतिहासिक वन रोपने की तैयारी की गई है। डीएम सीपी सिंह के निर्देश पर राजस्व टीमें जिलेभर में भूमि की तलाश में जुटी हुई हैं।
केवल कासगंज तहसील प्रशासन ने अब तक 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि गंगा की खादर में तलाश कर ली है। इनमें एक भूमि ऐसी है जिसका पूरा दायरा लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। इसी भूमि पर नया वन प्रस्तावित किया जा रहा है, जबकि 300 हेक्टेयर जमीन सोरों क्षेत्र में ही खादर में अलग अलग तलाशी गई है।
अवैध कब्जों से मुक्त कराई जा रही खादर की जमीन
एक नया वन बनाने एवं पौधरोपण के लिए तलाशी गई जमीन चिह्नित कर ली गई है। अब तहसील प्रशासन इस जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त करा रहा है। क्योंकि खादर की जमीन पर तमाम लोगों के कब्जे हैं। एसडीएम ललित कुमार ने राजस्व एवं पुलिस टीमों को संयुक्त रूप से जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए हैं।
तितली पार्क विकसित करने का भी सुझाव
एसडीएम ने भूमि तलाश करने के साथ-साथ जहां एक ओर नये वन के प्रस्ताव पर सुझाव दिए हैं वहीं नए वन में तितली पार्क विकसित करने का भी सुझाव वन विभाग को दिया है और तितली पार्क में विभिन्न प्रजातियों के फूल वाले पौधे प्रस्तावित वन में लगाने की सलाह दी है।
ग्राम समितियां बनेंगी
जो नया वन प्रस्तावित किया जा रहा है उसके संरक्षण को भी अभी से ही योजना तैयार की जा रही है। ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में लेखपालों और वन रक्षकों की ग्राम समितियां बनेंगी। इन्हें गांव वन समिति का नाम दिया जाएगा। यह समितियां जहां एक ओर वन संरक्षण करेंगी वहीं वन से होने वाली आय से किसानों को लाभान्वित करेंगी।
वर्जन-
- 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि तलाशी जा चुकी है। एक नया वन प्रस्तावित किया गया है। जमीन अवैध कब्जा मुक्त कराकर वन विभाग के सुपुर्द कर दी जाएगी। और भी जमीन की तलाश की जा रही है। - ललित कुमार, एसडीएम।