ताजमहल और बाबरपुर के आसपास 12 हजार पेड़ काटे जाने की जांच को मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति सवालों के घेरे में है। तीन सदस्यीय जांच समिति का अध्यक्ष मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर को बनाया गया है। लगभग दो साल पहले इन्हीं मंडलायुक्त ने भी आनंद वन (बाबरपुर) में पौधा रोपकर हरित पट्टी विकसित करने के काम का शुभारंभ कराया था। इसी जगह से आठ हजार पेड़ काटकर ठिकाने लगा दिए गए।
बता दें, पिछले दिनों मुख्य वन संरक्षक एके जैन की जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि ताजमहल और बाबरपुर के आसपास से 12 हजार पेड़ अवैध तरीके से कटवाए और बिना सक्षम अनुमति के बेचे गए। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया। इसके कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। इसका अध्यक्ष मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर को बनाया गया। समिति में अपर प्रमुख वन संरक्षक अजय कुमार द्विवेदी तथा मुख्य वन संरक्षक मनोज सिन्हा सदस्य होंगे। पर्यावरणविद् डीके जोशी ने मंडलायुक्त को समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि 16 अगस्त 2013 को आनंद वन (बाबरपुर) में मंडलायुक्त ने ही पहला पौधा रोपा था। अब इसी जगह से हजारों की संख्या में काटकर बेचे गए पेड़ों की जांच भी उन्हें ही सौंपी गई है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे जांच निष्पक्ष होने में संदेह है।
वर्जन
मंडलायुक्त को जांच समिति का अध्यक्ष नहीं बनाया जाना चाहिए। क्योंकि दो साल पहले उन्होंने उसी जगह पौध रोपण किया था, जहां हजारों की संख्या में पेड़ काटकर ठिकाने लगाए गए। इससे जांच प्रभावित हो सकती है। मामला एनजीटी तक ले जाया जाएगा।
- डीके जोशी, पर्यावरणविद
यह है मामला
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा के तत्कालीन जिला वन अधिकारी (डीएफओ) एनके जानू ने ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में आने वाले बाबरपुर से 8,000 तथा आसपास के इलाकों से 4,000 पेड़ कटवा दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है। नियम के अनुसार, इस क्षेत्र में शीर्ष अदालत की इजाजत लिए बिना पेड़ नहीं कटवाए जा सकते। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ज्यादातर पेड़ वर्ष 2011-12 के दौरान कटवाए गए।