चुनाव की तारीखों का एलान होते ही ब्रज में सियासी हलचल तेज हो गई। हो भी क्यों न, मैनपुरी को छोड़ पूरे ब्रज में पहले चरण में वोट डाले जाने हैं। जाहिर है, जिसका रंग ब्रज में जम जाएगा, उसका असर दूर तक जाएगा। लेकिन इस बार ब्रज का किला फतह करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। समीकरण बहुत उलझे हुए हैं। सपा में चल रहे संग्राम के चलते तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है।
इस बार के चुनाव में कुछ बातों का सीधा असर पड़ सकता है। एक तो मथुरा के जवाहरबाग कांड को भाजपा और बसपा बड़ा मुद्दा बनाने जा रहे हैं। दूसरा सपा में चल रही परिवार की कलह का चुनाव पर असर पड़ सकता है। कारण, ब्रज में सपा मुखिया मुलायम परिवार की पकड़ मानी जाती है।
फीरोजाबाद से रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय सांसद हैं। मैनपुरी के सांसद तेजवीर यादव भी इसी परिवार से आते हैं। दोनों को जीत तब मिली, जब मोदी लहर में बड़े-बड़े दिग्गज हार गए। तीसरा महत्वपूर्ण फैक्टर यह है कि इस बार भाजपा का फोकस ब्रज पर है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की ब्रज में दो रैलियां हो चुकी हैं। पहली मथुरा के फरह में उनकी सरकार का एक साल पूरा होने पर हुई थी। दूसरा कुछ दिन पहले आगरा के कोठी मीना बाजार में हुई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी लगातार रैलियां कर रहे हैं।
बसपा के लिए भी यह इलाका बेहद अहम रहा है। पिछले चुनाव में आगरा में नौ में से छह सीटों पर हाथी की जीत हुई थी। बसपा की सोशल इंजीनियरिंग में दलित वोट पहले नंबर पर बताए जाते हैं और आगरा को दलितों की राजधानी कहा जाता है। बसपा ने चुनाव अभियान की शुरुआत भी आगरा से की।
रालोद का फोकस मुख्य रूप से जाट बेल्ट में रहता है। खास तौर से मथुरा, हाथरस और अलीगढ़ में। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर आगरा और फीरोजाबाद से सांसद रहे हैं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी यहां रोड शो और खाट सभा कर चुके हैं। ब्रज के इस क्षेत्र में आगरा, मथुरा, कासगंज, एटा, मैनपुरी की 30 में से 14 सीटें सपा ने जीती थीं 2012 के चुनाव में।
भीड़ सबके हाथ, वोटर किसके हाथ
आगरा।
अभी तक की रैलियों में भीड़ खूब जुटी है। फिर चाहें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली हो या फिर बसपा अध्यक्ष मायावती की। दोनों ने आगरा में एक ही मैदान में रैली की। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एटा रैली में जबरदस्त भीड़ थी, तो रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह की बल्देव रैली में भी मैदान खचाखच भरा था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के रोड शो का रंग भी खूब जमा था। भीड़ सभी के साथ रही, मगर अब देखना है कि वोट किसके हाथ लगते हैं।