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दिलों में तूफान, लबों पर ताले 

Wed, 26 Oct 2016 01:04 AM IST
दिलों में तूफान, लबों पर ताले 
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दिलों में तूफान, लबों पर ताले  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दो दिन तक लखनऊ में डेरा डालने के बाद तमाम समाजवादी लौट आए हैं। कुछ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थन में पहुंचे थे, तो कुछ प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के । मगर, सपा सुप्रीम मुलायम सिंह यादव के सख्त रुख को देखते हुए बिना किसी के पक्ष में आवाज बुलंद किए वापस हो लिए हैं।
रविवार को सैफई परिवार में मचे सियासी घमासान के बाद अखिलेश और शिवपाल के तमाम समर्थक उसी दिन लखनऊ के लिए रवाना हो गए थे। दोनों के समर्थकों ने शहर में भी एक-दूसरे के समर्थन में कार्यक्रम भी किए। किसी ने अमर सिंह का पुतला फूंककर अखिलेश का झंडा बुलंद किया, तो किसी ने शिवपाल की सरकार से बर्खास्तगी पर रोष व्यक्त किया। मगर, जिस तेवर के साथ दोनों पक्षों के समर्थक लखनऊ पहुंचे थे, सपा मुखिया के तेवर ने उन्हें ठंडा कर दिया। स्थिति ये है कि लखनऊ से लौटने के बाद अब वे न तो किसी समर्थन में बात करना चाहते और न ही विरोध में। बेवजह की चर्चाएं कहीं तूल न पकड़ लें, इसलिए फतेहाबाद रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर भी जाने से कतरा रहे हैं। हालांकि कुरेदने पर न छापने की शर्त पर गुबार खूब निकल रहा है। 
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कहते हैं, अखिलेश यादव ने ठीक किया था। भविष्य में जरूरत पड़ने पर वे उन्हीं के साथ रहेंगे। वहीं, शिवपाल समर्थक भी मुलायम सिंह के फैसले से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि भले ही मुलायम सिंह यादव खुलकर शिवपाल का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन सरकार और संगठन में पहले से कमजोर भी किया है। दरअसल, खुलकर न बोलने का कारण इस कलह का फिलहाल अंत न होना बताया जा रहा है। पता नहीं, आने वाले दिनों में पार्टी में कौन, कितना मजबूत होकर उभर जाए। ऐसे में उन्हें किसी एक प्रति ज्यादा नजदीकी दिखाने का दुष्परिणाम न भुगतना पड़ सकता है। 
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