यह था मामला
भरतपुर के आदिबद्री धाम और कनकांचल पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में पसोपा में साधु-संतों के साथ अन्य ग्रामीण 551 दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन संत के आत्मदाह के प्रयास के बाद खत्म हुआ। 20 जुलाई को बड़ी संख्या में साधु-संत विरोध करने के लिए जुटे।
इसी दौरान आंदोलन स्थल पर संत विजयदास ने खुद को आग के हवाले कर दिया। पुलिस और अन्य लोगों ने उन्हें फौरन कंबल में लपेट दिया लेकिन तब तक वह 80 फीसदी झुलस चुके थे। उन्हें आरबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया था लेकिन उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें पहले जयपुर के एसएमएस अस्पताल, फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
शुक्रवार देर रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। शनिवार को संत विजय राघव दास का पार्थिव शरीर कड़ी सुरक्षा घेरे में बरसाना के माता जी गोशाला लाया गया। कामा के विमल कुंड में स्नान के उपरांत बरसाना स्थित माताजी गोशाला में सुनील दास ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई।