आगरा। ललित कला संस्थान (संस्कृति भवन) रविवार को लोक कलाओं की धड़कन से गूंज उठा। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान, लखनऊ और धरा चेतना फाउंडेशन की ओर से हमारी लोक कलाएं एवं सोशल मीडिया विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि अतुल द्विवेदी (निदेशक, उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान) ने लोक परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद पूरन डावर ने कहा कि ब्रज की लोक कलाएं विलुप्त होती जा रही हैं, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। हमें इन्हें बचाने के लिए आगे आना होगा।
समाजसेविका डॉ. रंजना बंसल ने कहा कि जरदोजी जैसी कला शहर में कमजोर हो चुकी है। सोशल मीडिया के माध्यम से इसे पुनर्जीवित कर कारीगरों को रोजगार से जोड़ा जा सकता है। उसे एक वैश्विक पहचान मिल सकती है।
वरिष्ठ साहित्यकार अरुण डंग ने हिंदी दिवस पर विचार रखे। साथ ही कहा कि सोशल मीडिया की ताकत असीम है। यह वह माध्यम है, जो लोक कलाओं को विश्व पटल तक पहुंचा सकता है। इसका उपयोग करना चाहिए। नेपाल में हुई हिंसा पर भी उन्होंने बात रखी।
संगोष्ठी में शशिप्रभा तिवारी, आलोक पराड़कर, डॉ. बीरेंद्र कुमार, अनिल शुक्ल, डॉ. शांतनु कुमार, अक्षय प्रताप सिंह और गति सिंह ने लोक परंपराओं की चुनौतियों और सोशल मीडिया की संभावनाओं पर विचार रखे। इस दौरान ब्रज की होली, राजस्थानी और मयूर नृत्य ने रंगारंग माहौल बना दिया। कार्यक्रम में उपनिदेशक डॉ. मनोज कुमार, विभागाध्यक्ष देवाशीष गांगुली, डॉ. शीतल शर्मा, लक्ष्मी, अनिल गुप्ता सहित कई लोग मौजूद रहे।