मैनपुरी। रामसर साइट में शामिल समान पक्षी विहार बदहाली से जूझ रहा है। पांच वर्ग किलोमीटर में फैले पक्षी विहार में कहीं लोग अवैध खनन कर रहे हैं तो कहीं खेती की जा रही है। इसके चलते जलीय पक्षियों का आश्रय प्रभावित हो रहा है। लेकिन अब सारस संरक्षण के लिए तैयार किए गए प्रोजेक्ट से फिर एक बार बदहाली के दिन बहुरने की उम्मीद जगी है।
मैनपुरी के विकास खंड किशनी की ग्राम पंचायत समान में स्थित पक्षी विहार को समान पक्षी विहार के नाम से जाना जाता है। इसका क्षेत्रफल लगभग 526 हेक्टेयर। क्षेत्रफल की दृष्टि से पक्षी विहार काफी वृहद है। इतना ही नहीं सारसों को भी यहां की नम भूमि खूब रास आती है। लेकिन शासन और प्रशासन की अनदेखी के चलते पक्षी विहार को विकसित नहीं किया जा सका। हाल ये है कि पक्षी विहार में कई जगह अब भी अवैध खनन किया जा रहा है। इन क्षेत्रों से जलीय पक्षियों ने दूरी बना ली है।
वहीं एक बड़े भू-भाग पर अब भी खेती की जा रह है। इस खेती में कीटनाशक दवाओं का प्रयोग हो रहा है। इसके कारण न तो सारस को भोजन मिल पाता है और न ही सारस इन क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं। लेकिन अब समान पक्षी विहार को सारस की शरण स्थली के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव से फिर एक बार उम्मीद जगी है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो समान पक्षी विहार राज्य पक्षी सारस के लिए सबसे बेहतर पनाहगाह साबित होगी।
लोगों को भी करना होगा प्रेरित
समान पक्षी विहार को विकसित करने के साथ-साथ लोगों को भी जागरूक करना होगा। उन्होंने ये बात समझानी होगी कि रामसर साइट में शामिल समान पक्षी विहार पर्यावरण के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही साथ पक्षी विहार के आसपास के वेटलैंड्स को भी फिर एक बार विकसित करना होगा। तभी सारस संरक्षण का सपना साकार हो सकेगा।