पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) के रथ पर सवार होकर 2027 विधानसभा चुनाव से सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही समाजवादी पार्टी का चुनावी शंखनाद दलितों की राजधानी से होगा। 15 नवंबर को अखिलेश यादव आगरा आएंगे। जीआईसी मैदान में दलित सम्मेलन होगा। जिसकी तैयारियां तेज हो गई हैं।
पीडीए के डी को साधने के लिए समाजवादी पार्टी ने आगरा को चुना है। सूबे की सियासी राह में डी की भूमिका निर्णायक है। ऐसे में विधानसभा चुनाव की बिसात बिछाने के लिए सपा ने बहुजन राजनीति के सबसे मजबूत गढ़ में सेंधमारी की रणनीति बनाई है। दलित सम्मेलन के संयोजक एवं राष्ट्रीय महासचिव सांसद रामजी लाल सुमन ने बताया कि इस सम्मेलन में आगरा, अलीगढ़ और मेरठ मंडल के जिलों से कार्यकर्ता शामिल होंगे। सभी जिलों में संपर्क हो चुका है। सभा स्थल का दौरा किया है। सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
उन्होंने कहा कि आगरा दलितों की राजधानी है। शहर में करीब पांच लाख से अधिक अनुसूचित वर्ग के मतदाता हैं। शहर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने बताया कि इस सम्मेलन के माध्यम से सपा अपने पीडीए फार्मूले को धरातल पर उतारेगी। बसपा के परंपरागत कैडर और आंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़े मतदाताओं को संदेश देने के लिए सपा कार्यकर्ताओं और छात्रसभा के सदस्यों को नीले रंग के परिधान में उतारा जाएगा। एमएलसी चुनाव में मिली सफलता से उत्साहित सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदले क्षेत्रीय सियासी समीकरणों के बीच सपा दलित समाज के अधिकार, आरक्षण, स्थायी नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को मुख्य एजेंडा बनाकर बहुजन समाज को साधने की कवायद कर रही है।