पुत्रदा एकादशी पर बटेश्वर में यमुना बचाओ परिक्रमा
बाह। बटेश्वर में सियाराम दास महाराज दो दशक से यमुना नदी की स्वच्छता की अलख जगा रहे हैं। एकादशी के दिन गिर्राज जी की तर्ज पर उन्होंने बटेश्वर की परिक्रमा की परंपरा शुरू की है। मंगलवार को बटेश्वर के घाट पर यमुना पूजन कर संतों और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलाल महाराज के दर्शन किए और यमुना की स्वच्छता की अलख जगाने के लिए निकल पड़े।
बटेश्वर मंदिर से शौरीपुर, वनखंडेश्वर, हनुमानगढ़ी, मनमथ होते हुए सियारामदास महाराज के आश्रम पर पदयात्रा पहुंची। परिक्रमा मार्ग हर-हर, बम-बम एवं राधे-राधे का जयघोष गूंजता रहा। हर नुक्कड़, तिराहे पर सियारामदास महाराज ने लोगों को नदी में गंदगी न डालने और स्वच्छता की मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक एकादशी पर परिक्रमा मार्ग की सफाई होनी चाहिए। पानी का प्रबंध हो, शौचालय का इंतजाम होना चाहिए। जिससे परिक्रमा करने वाली महिला श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि गिर्राज जी की तर्ज पर बटेश्वर में एकादशी को परिक्रमा लगाने एवं यमुना नदी की पवित्रता को बहाल करने के अभियान में शामिल होने को महिला श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। उन्होंने सरकार से बटेश्वर में यमुना नदी के पौराणिक स्वरूप को बहाल करने की मांग की है। ताकि बटेश्वर के मंदिर काॅरिडोर के विकास के बाद दर्शन-पूजन और यमुना स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को नदी के मैले आंचल से ठेस नहीं पहुंचे।