बकरियों को चारे में औषधीय पेड़ सहजन की पत्तियां देना पशु पालकों के लिए बेहद फायदे का सौदा साबित हो रहा है। सहजन में प्रोटीन की अधिकता के कारण बकरियों के वजन में डेढ़ गुना तक वृद्धि तेजी से हुई है। हो रही है। इससे पशु पालकों को बकरियों के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
दरअसल, मथुरा के फरह स्थित केंद्रीय बकरी शोध संस्थान (सीआईआरजी) के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया था कि सहजन का सेवन सिर्फ मनुष्यों के लिए बल्कि बकरियों के लिए भी फायदेमंद है। संस्थान ने ही किसानों को प्रेरित किया कि वे इसका चारा बकरियों को दें। इसके अच्छे नतीजों सामने आए हैं।
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बी राजकुमार ने बताया कि पांच साल पहले यह प्रयोग करके देखा गया कि बकरियों को चारे में सहजन की पत्तियां देने पर क्या नतीजा निकलता है? संस्थान में बकरियों की कई प्रजातियां हैं। ब्रज में आमतौर पर जमना परी और बरबरी प्रजाति पाली जाती है। इन पर ही प्रयोग किया। इनमें बकरियों का वजन बढ़ाने के उद्देश्य से पालने वाले पशुपालक बरबरी को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह आकार में जमना परी से बड़ी होती है।
सहजन की 100 ग्राम पत्तियों में होता है 9.40 ग्राम प्रोटीन
किसानों के समूहों को प्रेरित किया गया कि वे चारे में सहजन (वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा) दें। सहजन की 100 ग्राम पत्तियों में 9.40 ग्राम प्रोटीन, 1.40 ग्राम वसा, 8.28 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। यह सुपाच्य भी है। संस्थान में बकरियों को इसका चारा देने पर नतीजे अच्छे आए, तब किसानों को प्रेरित किया गया। अब किसान आकर बताते हैं कि सहजन से उनकी बकरियों की वृद्धि डेढ़ गुना तक तेजी से हुई।
यूएई, सऊदी अरब और सीरिया में बरबरी की भारी मांग
ब्रज के जिले आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद में बरबरी नस्ल की बकरी पाली जाती है। इसकी यूएई, सऊदी अरब, सीरिया में भारी मांग है। पशु पालक विक्रेताओं को बरबरी प्रजाति की बकरी बेचते हैं तो उन्हें अच्छा दाम मिलता है। बकरी का आकार देखकर दाम तय होता है। ऐसे में पशुपालकों की आमदनी बढ़ी है।
आमदनी बढ़ गई
गांव मकदूम निवासी राजू ने बताया कि मेरी चार बकरियां है। पिछले साल बकरी शोध संस्थान में प्रशिक्षण लिया था। वैज्ञानिकों की सलाह पर चारे में सहजन की पत्तियां देना शुरू हुआ। उनका वजन तेजी से बढ़ गया। मुझे अच्छे पैसे मिलने लगे और आमदनी बढ़ गई।
बकरियों की मांग बढ़ी
दौलतपुर के सलीम ने बताया कि मैं बकरियों को बेचने के लिए मेले में ले जाता हूं। इटावा मेले में ले गया तो हाथों हाथ बिक गई। लोग पूछ रहे थे कि बकरियों की तंदरुस्ती का राज क्या है, मैंने बताया इन्हें सहजन खिलाता हूं।