आगरा। केंद्रीय जल आयोग की नई रिपोर्ट ने आगरा में यमुना नदी पर बैराज निर्माण की उम्मीदों को नई संजीवनी मिली है। आयोग ने पूर्व में प्रस्तावित रबर डैम योजना को तकनीकी रूप से व्यावहारिक न मानते हुए उसे निरस्त कर दिया है। इसके स्थान पर आयोग ने ताजमहल के पीछे डाउन स्ट्रीम में यमुना पर एक पारंपरिक पक्का बैराज बनाने की सिफारिश की है। इस निर्देश के बाद अब सिंचाई विभाग नए सिरे से प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) तैयार करेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आगरा के रहनकलां में ग्रेटर आगरा परियोजना के शिलान्यास के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि जैसे ही बैराज की नई डीपीआर प्राप्त होगी, सरकार जल्द से जल्द यमुना पर बैराज निर्माण का कार्य शुरू कराएगी। ऐसे में अब शासन से हरी झंडी मिलने का रास्ता भी साफ है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज सिंह ने बताया कि विभाग ने रबर डैम के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के लिए फाइल केंद्रीय जल आयोग को भेजी थी। आयोग ने रबर डैम के बजाय गोकुल बैराज की तर्ज पर पक्का बैराज बनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि चूंकि रबर डैम के लिए अधिकांश आपत्तियां और सर्वे का काम पहले ही पूरा हो चुका है, इसलिए बैराज की नई डीपीआर बनाने में समय की बचत होगी। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यह बैराज ताजमहल से लगभग 1.5 किमी डाउन स्ट्रीम में प्रस्तावित होगा।
नौ साल बाद बदली रबर डैम की स्थिति
मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में योगी आदित्यनाथ ने हाथी घाट पर यमुना का निरीक्षण किया था और नगला पेमा में रबर डैम का शिलान्यास किया था। हालांकि, विभिन्न विभागों से अनापत्ति न मिल पाने के कारण यह प्रोजेक्ट नौ साल से अधर में लटका रहा। अब स्थिति बदल गई है।
रबर डैम प्रोजेक्ट की झलक
लागत- करीब ₹350 करोड़।
लंबाई- 340 मीटर।
तकनीक- इसमें 55-55 मीटर के 5 बैलून गेट प्रस्तावित थे, जो बुलेटप्रूफ रबर (एथिलीन प्रोपाइलिन डाइन मोनोमर) से बनने थे।
हालिया बजट- चालू बजट में इसके लिए ₹20 करोड़ का प्रावधान किया गया था (₹10 करोड़ निर्माण और ₹10 करोड़ भूमि अधिग्रहण के लिए)।
35 साल से यमुना पर बैराज का इंतजार
आगरा में यमुना पर बैराज की मांग 1990 से लंबित है। रिवर कनेक्ट कैंपेन संयोजक ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि पिछले 35 वर्षों में राज्यपाल से लेकर कई मुख्यमंत्रियों ने बैराज का शिलान्यास किया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। आगरा में यमुना का जलस्तर सुधारने, ताजमहल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शहर के गिरते भूजल स्तर को थामने के लिए यह बैराज निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यमुना पर करीब 40 किमी अप-स्ट्रीम में गोकुल बैराज स्थित है।