राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को प्रांत संघचालकों की बैठक में संघचालक के दायित्वों का बोध कराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अहम कड़ी संघचालक ही होता है। लिहाजा सब कुछ भूलकर संघ के लिए काम करें।
संघ प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में 1929 में संघचालक का पद बना। सबसे पहले संघचालक डॉ. हेडगेवार ही थे। कहा कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संघचालक का दायित्व कितना अहम है।
संघचालक के दायित्वों का मर्म समझाते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ समाज के बीच में रहकर कार्य करता है और वास्तव में संघ का कार्य समाज का ही कार्य है। उन्होंने कहा कि समाज में हमारा क्या योगदान होगा, यह हमें निश्चित करना है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं से हमें आत्मीय संबंध स्थापित करने हैं। समाज में वंचितों, शोषितों और पीड़ितों के हक के लिए काम करना ही कार्य की सार्थकता है।
अंतिम चरणों में पहुंची कार्यक्रम की तैयारी
संघ
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सुनारी गांव में समरसता संगम के लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। प्रांत प्रचार प्रमुख केशव ने बताया कि मैदान में तीन मंच बनाए जा रहे हैं। एक मंच पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के लिए, दूसरे मंच पर संत समाज विराजमान होगा और तीसरा मंच मातृ शक्ति के लिए है।
कार्यक्रम स्थल पर तैयारियां अंतिम चरण हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनसे मिलेंगे और सद्भावना प्रमुखों की बैठक होगी।
शाम को वे समर्पण ब्लड बैंक में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। 24 फरवरी को सुबह दयालबाग में हुजूर महाराज से उनकी मुलाकात का कार्यक्रम है और दोपहर में समरसता संगम को संबोधित करेंगे।
तीन द्वारों से दिया जाएगा प्रवेश
सुनारी में आयोजित स्वयंसेवक एकत्रीकरण में तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। सिंह द्वार से सरसंघचालक मोहन भागवत, संतगण, मातृ शक्ति व अतिथि प्रवेश करेंगे। योगाभ्यास करने वाले स्वयंसेवकों के लिए पृथक द्वार का निर्माण किया गया है। वहीं अन्य दूसरे द्वार से कार्यक्रम में पंजीकृत स्वयंसेवकों, व्यवस्थाओं में लगे बंधुगणों का प्रवेश होगा।