अमांपुर। बाल विकास परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र नादरमई में तैनात रहीं इंदूवती को 3.3 लाख रुपये मानदेय की वसूली का नोटिस जारी किया है। इंदूवती को फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल करने की शिकायत पर वर्ष 2020 में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद भी उसके खाते में 2024 तक मानदेय पहुंचता रहा था। शिकायत के बाद जांच में मामला सही मिला। अब मानदेय की धनराशि वसूली जाएगी। गांव नगला गढ़ी निवासी शनि कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र नादरमई में तैनात रही इंदूवती ने फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल की थी। जांच में इसकी पुष्टि होने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी के आदेश पर 19 अगस्त 2020 में को बर्खास्त कर दिया गया था। अक्तूबर 2024 तक उसके खाते में मानदेय पहुंचता रहा। पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से अगस्त 2020 से अक्तूबर 2024 तक खाते में 3,35,912 रुपये की धनराशि भेजी गई। इसकी सूचना इंदूवती ने विभाग को नहीं दी और एकाउंट से धनराशि निकाल ली। शनि कुमार ने मामले में आरटीआई लगाई तो इसका खुलासा हुआ था। बाल विकास परियोजना अधिकारी ने सेवा नियमावली का उल्लंघन बताते हुए इंदूवती को नोटिस जारी किया है। दो दिन के अंदर बर्खास्त होने के बाद खाते से निकाले गए मानदेय की धनराशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। धनराशि जमा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। डीपीओ सुशीला यादव ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की गई है। धनराशि की रिकवरी की जाएगी।मामले में शिकायतकर्ता शनि कुमार का कहना है कि आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत करने के बाद नोटिस जारी कर दिया गया है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बर्खास्तगी के बाद भी वेतन जारी करवाने में कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी दोषी थे। विभाग को दोषी कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय करनी चाहिए।