8 नवंबर 2016 को 500 के पुराने और एक हजार रुपये के नोट बंद कर दिए गए। 30 दिसंबर तक बैंकों ने बंद हो चुके इन दोनों नोटों को जमा किया, लेकिन 18 महीने के बाद भी बैंक ग्राहकों से इसका ब्यौरा मांग रहे हैं।
बैंकों की जमा पर्ची पर अब भी एक हजार रुपये के नोट का ब्यौरा नगदी जमा करने पर मांगा जा रहा है। इलाहाबाद बैंक समेत दस से ज्यादा बैंकों में नगदी जमा करने वाली पर्ची में एक हजार रुपये के नोट का जिक्र है।
बैंक प्रबंधन ने जमा पर्ची में नोटबंदी के बाद जारी किए गए दो हजार रुपये के नोट को सबसे ऊपर रखा है। इसके बाद 1000, 500, 200, 100, 50, 50, 10 और पांच रुपये के नोटों का ब्यौरा मांगने के लिए रखा है।
केवल इलाहाबाद बैंक ही नहीं, अन्य बैंकों में भी इस गलती को दोहराया जा रहा है। स्टेट बैंक, बैंक आफ इंडिया और निजी बैंकों ने नोटबंदी के तुरंत बाद ही अपनी जमा पर्चियों में बदलाव किए थे।